शहर के अवैध फाइनेंसरों व सूदखोरों के खिलाफ अमर उजाला की मुहिम का असर दिखना शुरू हो गया है। खबर पढ़कर अब लोग इन सूदखोरों के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। ऐसा ही कांसापुर निवासी एक वैल्डर ने किया। 72 सौ रुपये का काफी समय से ब्याज चुकाने के बाद जब वैल्डर ने हिसाब किया तो उसकी ओर फाइनेंसरों ने 25 हजार रुपये निकाल दिए। जिसका वैल्डर ने विरोध किया, तो उसे जान की खैरियत की धमकी देते हुए उसकी बाइक उठाकर ले गए। जिसकी पीड़ित ने पुलिस को शिकायत दी है। पीड़ित ने अमर उजाला में कॉल करके अपनी दास्तां बताई। पीड़ित ने बताया कि उसने फाइनेंसर के केवल 12 सौ रुपये देने हैं। लॉडाउन के दौरान वह किश्त नहीं दे पाया, जिस पर उसने उसके 25 हजार रुपये बना दिए हैं। पीड़ित ने पुलिस और प्रशासन से मामले में कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि ऐसे सूदखोरों के खिलाफ प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। ऐसी प्रताड़ना के चलते ही लोग गलत कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
कांसापुर निवासी रविंद्रपाल सिंह ने बताया कि वह एक फैक्टरी में वैल्डर है। इसी से वह परिवार का गुजारा करता है। जनवरी में उसके ऊपर कुछ अतिरिक्त पारिवारिक खर्च आ गया था। उसने बताया कि उसकी तनख्वाह से खिंचतान कर घर चलता है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च वहन करने का उसमें सामर्थ नहीं था। रविंद्र ने बताया कि उसने सुना था कि फाइनेंसरों से आसान किश्त पर रुपये मिलते हैं। उसने पास स्थित फाइनेंस का काम करने वाले एक मेडिकल स्टोर संचालक से बात की। फाइनेंसर ने सप्ताहिक किश्त पर रुपये देने की स्कीम बताई। जिसके अनुसार आठ हजार रुपये दिए जाते हैं और बदले में साढ़े 12 हजार रुपये लिए जाते हैं। साढ़े 12 हजार रुपये की सप्ताहिक किश्त बनाई जाती है। रविंद्र ने बताया कि 16 जनवरी को उसने कर्ज लिया था। हर सप्ताह वह सात से आठ सौ रुपये किश्त देता था। उसे किश्तों में इसे खत्म करना था। रविंद्र ने बताया कि आठ हजार रुपये का केस करने पर पहली किश्त के आठ सौ रुपये फाइनेंसर ने काटकर उसे 72 सौ रुपये दिए थे।
रविंद्र ने बताया कि लॉकडाउन के पहले तक वह नियमित रूप से रुपये देता रहा। लेकिन लॉकडाउन में काम नहीं था। ऐसे में उसकी किश्त रूक गई। काम न होने के बावजूद वह फाइनेंसर को दूसरे तीसरे दिन दौ रुपये दे देता था। उसके केवल 12 सौ रुपये देने बाकी रह गए थे। लेकिन अब फाइनेंसर ने 25 हजार रुपये बना दिए हैं।
पीड़ित रविंद्र ने बताया कि पहले 14 दिन के लॉकडाउन में तो किसी तरह उसने कुछ रुपये फाइनेंसर को दे दिए। लेकिन उसके बाद काम न होने के कारण वह रुपये न दे सका। जिस पर फाइनेंसर ने सवा दो सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पैनेल्टी लगाते हुए 25 हजार रुपये बना दिए हैं।
रविंद्र ने बताया कि शुक्रवार को वह बाइक से अपनी बहन के घर गया था। बाइक घर के बाहर खड़ी कर अंदर चला गया। इस दौरान फाइनेंसर उसकी बाइक उठा ले गया। बाइक ले जाने के बाद उसने कॉल करके कहा कि आज बाइक ले जा रहा हूं। रुपये जल्दी पहुंचा दे, नहीं तो तेरी खैर नहीं है। वहीं धमकी देते हुए कहा कि इसके बाद सीधे घर घुसेंगे।