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Yamuna Nagar News: बढ़ता खर्च, घटता समय... सिमट रहा रामलीला का मंचन

Sun, 04 Oct 2026 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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जगाधरी में अभ्यास करते श्रीशारदा रामलीला ड्रामेटिक कमेटी के कलाकार। संवाद
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अभय सिंह
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जगाधरी। रामलीला मंचन की परंपरा आज भी कायम है। करीब पांच दशक पहले यमुनानगर-जगाधरी में 15 से अधिक स्थानों पर रामलीला का मंचन होता था। अब यह संख्या सिमटकर सात-आठ स्थानों तक रह गई है। बढ़ता खर्च, संसाधनों की कमी और युवाओं की व्यस्तता इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
रामलीला मंचन के लिए करीब दो महीने पहले से कलाकारों का अभ्यास शुरू हो जाता है। पहले युवा और लोग इसमें उत्साह से हिस्सा लेते थे, लेकिन अब नौकरी, कारोबार और दूसरे शहरों में रहने के कारण युवाओं के पास पर्याप्त समय नहीं है। ऐसे में राम, लक्ष्मण, सीता और रावण जैसे प्रमुख पात्रों के अलावा कई छोटे पात्रों की भूमिका पुराने कलाकार ही निभा रहे हैं। हालांकि सभी कमेटियों का प्रयास है कि धीरे-धीरे नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए। इसके लिए कमेटियों ने कई युवाओं को मुख्य पात्रों के लिए तैयार भी किया है। संवाद
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पांच दशक में 20 गुना तक बढ़ा खर्च

जिले की सबसे पुरानी श्री यमुना रामलीला कमेटी के प्रधान अजय गोयल ने बताया कि रामलीला मंचन का खर्च पिछले पांच दशक में कई गुना बढ़ गया है। 1965-70 के आसपास बड़े स्तर पर रामलीला का मंचन करीब एक लाख रुपये में हो जाता था। अब सामान्य स्तर की रामलीला पर भी करीब 20 लाख रुपये तक खर्च हो जाता है। छोटे स्तर पर भी पांच से छह लाख रुपये खर्च होते हैं। श्रीराम बारात, राजतिलक और पुतला दहन का खर्च इसके अतिरिक्त होता है। अकेले पुतला बनाने में तीन से चार लाख रुपये तक लग जाते हैं।
कई स्थानों पर बंद हो चुकी रामलीला

यमुनानगर-जगाधरी में इस समय पुरानी सब्जी मंडी, आईटीआई सब्जी मंडी, जगाधरी वर्कशॉप, रामपुरा पार्क, पुरानी अनाज मंडी, रामलीला भवन, झंडा चौक और पंजाबी धर्मशाला सहित करीब आठ स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जाता है। पुराना हमीदा, शादीपुर, कैंप के दो स्थानों, गुलाब नगर सहित कई जगहों की रामलीला बंद हो चुकी है।

खर्च के साथ बदली मंचन की तस्वीर

जगाधरी की श्री शारदा रामलीला नाट्य समिति के निदेशक और पूर्व में राम की भूमिका निभा चुके वीरेंद्र शर्मा बताते हैं कि वर्ष 1972 में समिति की शुरुआत हुई थी। उस समय एक लाख रुपये से कम में रामलीला का मंचन हो जाता था। अब तकनीक और संसाधनों के बढ़ने के साथ खर्च भी काफी बढ़ गया है। उ
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युवाओं की व्यस्तता बनी बाधा
श्री यमुना रामलीला कमेटी के सह-निदेशक और पूर्व में राम की भूमिका निभा चुके मुकेश सैनी बताते हैं कि आज प्रतिस्पर्धा के दौर में युवाओं की व्यस्तता काफी बढ़ गई है। बहुत से युवा नौकरी और कारोबार के लिए दूसरे शहरों व देशों में चले जाते हैं। ऐसे में इच्छा होने के बावजूद वे रामलीला के लिए समय नहीं निकाल पाते। उनका कहना है कि कमेटियां पुराने कलाकारों के स्थान पर नई पीढ़ी को आगे लाने का प्रयास कर रही हैं।

जगाधरी में अभ्यास करते श्रीशारदा रामलीला ड्रामेटिक कमेटी के कलाकार। संवाद

जगाधरी में अभ्यास करते श्रीशारदा रामलीला ड्रामेटिक कमेटी के कलाकार। संवाद

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