रोडवेज डिपो यमुनानगर में बसों की संख्या बढ़ने की बजाय इस माह घट गई। इससे कई रूट पर बसों की संख्या कम हो गई। 31 दिसंबर को रोडवेज बेड़े से 10 बसों की विदाई हो गई। ये दस बसें कंडम हो चुकी थीं।
अभी इन कंडम बसों की जगह पर नई बसें भी डिपो में नहीं आ पाई हैं। इससे कंडम बसों के रूट पर नई बसें भी नहीं चल पाई हैं। न ही इस महीने चलने की उम्मीद है। क्योंकि ड्राइवरों की कमी के चलते अधिकारी भी नई बसों को मंगवाना नहीं चाहते।
अधिकारी चाहते हैं कि जब नए ड्राइवरों की नियुक्ति होगी तब ही नए बसें मंगवाई जाएंगी। दस बसें कंडम होने और कंडम हुई बसों के रूट पर नई बसें न चलने से दिक्कत यात्रियों को होने वाली हैं।
क्योंकि बस सर्विस कम होने के चलते या तो उन्हें दूसरी बसों में भीड़ में सफर करना पड़ेगा या फिर अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ेगा। कंडम हुई दस बसों में से नौ बसों की नीलामी सोमवार को होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे रद्द कर दिया गया है।
एक बस पर केस चल रहा है, जिससे उसे नीलामी से बाहर रखा गया था। डिपो अधिकारियों का कहना है कि अब दोबारा से नीलामी की तारीख तय की जाएगी।
सभी कंडम बसें लोकल रूट की
जो बसें कंडम होने की वजह से वर्कशाप में खड़ी की गई हैं, ये सभी बसें लोकल रूट पर चलने वाली थीं। इसमें कुरुक्षेत्र, अंबाला, सहारनपुर और करनाल रूट पर बसें चल रही थीं। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि ये सभी बसें 2005 मॉडल थी। अब यमुनानगर डिपो में कोई भी बस 2005 मॉडल नहीं रही है।
सभी बसें 2005 मॉडल से ऊपर की रह गई हैं, जिनकी संख्या 150 है। रोडवेज अधिकारियों की ओर से मार्च तक यमुनानगर डिपो में बसों की संख्या 190 करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ड्राइवों की नियुक्ति न होने से मामला बीच में ही फंसा है। रोडवेज की ड्राइवरों की भर्ती से 68 ड्राइवर यमुनानगर डिपो को मिलने हैं।
अगर इन 68 ड्राइवरों की सरकार नियुक्ति कर देती है तो अगले दो माह तक यमुनानगर डिपो को 40 नई बसें मिलेंगी, जिससे यात्रियों को काफी फायदा होगा। जिन रूटों पर बसें कंडम होने से सर्विस घटी है नए ड्राइवर और बसें आने से इन रूट पर अतिरिक्त बसें चल सकेंगी।
रोडवेज यूनियन नेताओं का कहना है कि अगर जल्द ही सरकार की ओर से ड्राइवरों की नियुक्ति और नई बसों को बेड़े में शामिल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में दिक्कत आ सकती है। क्योंकि इन दिनों कई ऐसी बसें ऑन द रूट हैं, जोकि कंडम होने को हैं।
आने वाले माह में अगर ये बसें भी रूट से बाहर हो गई तो यात्रियों के लिए दिक्कत खड़ी हो जाएगी।
आवेदन करने वाले बीच में फंसे
सरकार की ओर से नए ड्राइवरों की भर्ती करने के लिए प्रक्रिया गत वर्ष से शुरू की हुई है। सितंबर माह में इंटरव्यू हो गए और स्थानीय अधिकारियों की ओर से लिस्ट हेड ऑफिस भेज दी गई, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से लिस्ट जारी नहीं की गई है। इससे आवेदन करने वाले बेरोजगार बीच में फंसे हुए हैं।
इन लोगों का कहना है कि सरकार ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है न तो वे कोई और ही काम शुरू कर पा रहे हैं और न ही इधर सरकार लिस्ट जारी कर रही है, जिससे बीच में वे फंसे हुए हैं।
उनका कहना है कि सरकार को लिस्ट जल्द जारी करनी चाहिए, इससे जहां उनके साथ-साथ रोडवेज को भी फायदा होगा क्योंकि ड्राइवर पूरे होंगे तो नई बसें आएंगी, जिससे रोडवेज की आमदन भी बढ़ेगी।