पात्र अध्यापक संघ की रादौर इकाई की एक बैठक शुक्रवार को प्रदेश संयुक्त सचिव चरणजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई।
बैठक में प्रदेश सरकार की ओर से भाषा अध्यापकों और टीजीटी की भर्ती न निकाले जाने पर पात्र अध्यापकों ने रोष प्रकट किया।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश संयुक्त सचिव चरणजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश में पात्रता परीक्षा की शुरुआत 2008 में हुई थी। अब तक प्रदेश में छह बार पात्रता परीक्षा हो चुकी है।
प्रदेश में बेरोजगार पात्र भाषा और टीजीटी अध्यापकों की संख्या 35 हजार से भी अधिक हो चुकी है। लेकिन अभी तक सरकार ने एक भी भाषा अध्यापक का पद विज्ञापित नहीं किया है। उन्हाेंने कहा कि पात्रता परीक्षा पास हजारों पात्र अध्यापक सरकार की गलत नीतियों के कारण मजदूरी करने पर विवश हैं। परीक्षा पास कर चुके सैकड़ों पात्रों की तो नौकरी प्राप्त करने की आयु सीमा भी निकल चुकी है, लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
दूसरी तरफ स्कूलों में हजारों भाषा और टीजीटी अध्यापकों के पद इस समय खाली पडे़ हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार स्कूलों में खाली पडे़ अध्यापकों के पदों पर जल्द से जल्द अध्यापकों की भर्ती करें, ताकि पात्र अध्यापकों को इसमें मौका मिल सके।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अब भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया तो पात्र अध्यापक संघ जल्द ही रोहतक में एक बैठक का आयोजन कर सरकार के खिलाफ आगामी रणनीति तय करेगा। इस मौके पर हरजिंद्र सिंह, यूनिस खान, मनीष कुमार, अवतार सिंह, हिशम सिंह, राजकुमार, अमित और पवन कुमार सहित अन्य अध्यापक मौजूद थे।