संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कैंप क्षेत्र में कभी दो-दो रामलीला मंचन होते थे। वर्ष 1999 में रामलीला मंचन के दौरान झगड़े में व्यक्ति की मौत हो गई थी, तब से कैंप के दोनों रामलीला मंचन पर रोक लगा दी गई। यहां 25 वर्षों से दोनों रामलीला मंचन बंद है। 29 वर्ष चले रामलीला के दो मंचन में अभिनय कर चुके लोग अभी भी उनके निभाए किरदारों के नाम से पहचाना जाते हैं।
कैंप में वर्ष 1970 से 1999 तक दो रामलीला के मंचन होते रहे। इनमें एक मंचन श्रीकृष्ण कला मंच और दूसरा मंचन तिलक आर्ट क्लब की ओर से कराया जा रहा था, लेकिन 25 वर्षों से दोनों मंचन बंद है। इसकी वजह से कैंप की अधिकांश युवा पीढ़ी अनभिज्ञ है, पर मंचन से जुड़े कलाकार और कैंप के बड़े-बुजुर्ग वर्ष 1999 में दो अक्टूबर की रात को याद कर सिहर जाते हैं।
उस रात मेन बाजार के रामलीला मंचन में स्टेज पर लक्ष्मण मेघनाद संवाद चल रहा था। कैंप सहित आसपास के सैकड़ों लोग स्टेज पर निगाहें गढ़ाए बैठे थे कि तभी किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी। अफर-तफरी के बाद पता चला कि कुछ लोगों का झगड़ा हो गया है, जिसमें व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना के बाद से रामलीला के दोनों मंचन बंद कर दिए गए, जो आज तक बाद भी दोबारा शुरू नहीं हो पाए हैं।
युवा पीढ़ी संभाले मंचन की बागडोर
रामलीला मंचन में एक से दो दशक तक अलग-अलग किरदार निभाने वाले कैंप के लोगों को आज भी मंचन से जुड़ी यादें ताजा हैं। जो अलग-अलग काम-धंधे में लगे हैं और उन्हें अब भी रामलीला मंचन दोबारा शुरू होने की आस है। इन स्थानीय कलाकारों में राय साहब श्रीराम, सतेंद्र राणा रावण, मारीच, दूषण व कालिदास ,मेघनाथ व कुंभकरण, किशोरी लाल कॉमेडियन बतौर अभिनय करते थे। नरेश मेहंदीरता श्रीकृष्ण कला मंच के डायरेक्टर रह चुके हैं। ये सभी बताते हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी तक रामलीला के संदेश पहुंचे, इसके लिए युवा पीढ़ी को मंचन की बागडोर संभालने की जरूरत है।