यमुनानगर। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी सदन का कार्यकाल पांच माह पहले खत्म हो चुका है, पर अब तक आगामी नगर निगम चुनाव के लिए वार्डबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इससे निवर्तमान पार्षद नाराज हैं। उनकी मानें तो वार्डबंदी में देरी से नगर निगम के चुनाव में भी देरी हो रही है। जिसका सीधा असर शहर के विकास पर पड़ रहा है। चुनाव न होने तक सदन की बैठकें नहीं हो पाएंगी। जबकि सदन बैठकों से शहर में चल रहे कामों पर अफसरों की जवाबदेही तय होने के साथ वार्डों के लिए नए कामों के प्रस्ताव मंजूर होते हैं।
जानकारी के अनुसार वार्डबंदी के लिए करीब डेढ़ साल पहले ही एडहॉक कमेटी का गठन कर लिया गया था, इसके बावजूद वार्डबंदी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले वार्डबंदी का प्रारूप तैयार करने के लिए तेजी से कार्य हुआ, जिसका प्रस्ताव भी सरकार को भेजा, पर इसके आगे कार्रवाई लटक गई। निवर्तमान पार्षदों में रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह ने बताया कि वार्डबंदी की प्रक्रिया सदन का कार्यकाल रहते ही पूरी कर ली जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कार्यकाल खत्म होने के पांच माह बाद भी वार्डबंदी की प्रक्रिया पूरी नहीं है। इससे आगामी नगर निगम चुनाव में भी देरी हो रही है, जिसका सीधा असर शहर के विकास पर पड़ रहा है। चुनाव न होने तक सदन बैठकें नहीं हो पाएंगी। इन सदन बैठकों से ही शहर के कामों पर अफसरों की जवाबदेही तय होने के साथ वार्डों के नए कामों के प्रस्ताव मंजूर होते हैं।
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इस संबंध में सरकार की ओर से फिलहाल दिशा निर्देश नहीं आए हैं। जैसे ही दिशा निर्देश जारी होंगे, उसके मुताबिक आगामी कार्रवाई की जाएगी।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।