संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। निजी अस्पतालों ने अगर डेंगू व मलेरिया कंफर्म मरीजों की जानकारी यदि स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी तो उन पर गाज गिर सकती है।
जिला मलेरिया अधिकारी ने निर्देश जारी किए है कि निजी अस्पताल में केस मिलने पर वहां के डॉक्टरों को तुरंत इसकी सूचना सिविल सर्जन कार्यालय या फिर उसने कार्यालय में देनी होगी। ऐसा इसलिए ताकि समय रहते मरीजों का उपचार शुरू किया जा सके।
फिलहाल जिले में डेंगू के तीन व मलेरिया के दो केस मिले हैं। गत वर्ष डेंगू के 190 और इससे पहले 2023 में 735 केस मिले थे।
कुछ दिनों तक केमिस्ट या फिर क्लीनिक से दवा लेने पर बुखार ठीक नहीं होता तो लोग निजी अस्पतालों की तरफ अपना रुख करते हैं। निजी अस्पताल मरीज के लैब टेस्ट कराने के बाद उनका उपचार शुरू कर देते हैं।
दिक्कत यह है कि अस्पताल के डॉक्टर डेंगू या फिर मलेरिया कंफर्म होने के कई दिन बाद भी इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग में नहीं देते हैं। ऐसे में लोगों को निजी अस्पताल का मोटा बिल चुकाना पड़ता है। यदि एक बार स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे दी तो वह निजी अस्पतालों से मरीज के बारे में रिपोर्ट लेते रहते हैं।
इससे इलाज के नाम पर ली जाने वाली राशि की पोल खुलने का खतरा रहता है। इइस बार स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते अस्पतालों को आगाह कर दिया है। जो भी अस्पताल समय पर सूचना नहीं देगा उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित कर दिया है कि कोई भी निजी अस्पताल डेंगू की जांच के लिए लैब टेस्ट के 600 रुपये से अधिक नहीं लिए जा सकेंगे। जिले में कुल 116 निजी अस्पताल हैं।
सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में लोग डेंगू व मलेरिया का उपचार कराने के लिए जाते हैं। सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि उनके पास कोई डेंगू या मलेरिया का कंफर्म केस या फिर किसी में लक्षण मिलते हैं तो वह इसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दे। सूचना नहीं देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुशीला सैनी, जिला मलेरिया अधिकारी यमुनानगर।