यमुनानगर। आयुष्मान चिरायु योजना के तहत जिले में निजी अस्पतालों का 35 करोड़ रुपये से अधिक स्वास्थ्य विभाग की तरफ बकाया है।
भुगतान लंबित होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराते संकट को देखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पहले ही कड़ी नाराजगी जता चुकी है और योजना के बहिष्कार तक की चेतावनी दे चुकी है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जिले में करीब सात लाख छह हजार पात्र लाभार्थियों को इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है।
निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान न मिलने से उनकी भागीदारी प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार ने कई सामान्य बीमारियों और सर्जरी जैसे घुटना, मोतियाबिंद, बवासीर, अंडकोष में पानी, यूरिन संबंधी उपचार, कूल्हा, कान का पर्दा, हर्निया, अपेंडिक्स, सांस व उल्टी-दस्त से जुड़े इलाज निजी अस्पतालों से हटाकर केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित कर दिए हैं। इस फैसले के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों का दबाव तेजी से बढ़ा है। पहले जहां इन बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध था, वहीं अब मरीजों को लंबी कतारों के बीच इलाज कराना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिले में एक लाख 17 हजार 500 से अधिक मरीजों ने आयुष्मान योजना के तहत उपचार कराया है। इसके एवज में सरकार द्वारा लगभग 122 करोड़ रुपये का भुगतान निजी और सरकारी अस्पतालों को किया जा चुका है। जिले में कुल 54 अस्पताल इस योजना के तहत पैनल पर शामिल हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। नवंबर 2022 में योजना का विस्तार करते हुए 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया था। वर्तमान में जिले में आयुष्मान योजना के तहत 2.74 लाख और आयुष्मान चिरायु योजना के तहत 4.84 लाख कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान वय वंदन योजना के तहत करीब 11 हजार बुजुर्गों के कार्ड भी जारी किए गए हैं। निजी अस्पतालों में अब तक 74 हजार से अधिक कार्डधारक मरीज इलाज करवा चुके हैं। बकाया भुगतान की समस्या के चलते निजी अस्पतालों की भागीदारी कमजोर पड़ती दिख रही है। संवाद