संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। बोर्ड की परीक्षा में कम परिणाम देने वाले राजकीय विद्यालयों के मुखियाओं को शिक्षा निदेशालय ने तलब किया है। वीरवार को प्रदेशभर से उत्कृष्ट परिणाम व सबसे कम परिणाम देने वाले पहले दस नंबर के स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों को तलब किया गया। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी को भी बुलाया गया था। निदेशालय की इस बैठक में शिक्षामंत्री भी उपस्थित रहे।
बैठक में निदेशालय के अधिकारियों ने कम परिणाम देने वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों से कम परिणाम का कारण पूछा। इस दौरान जिले से तीन स्कूलों के प्रधानाध्यापक और प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय गए थे। जिले में दसवीं कक्षा का सबसे कम परिणाम छछरौली खंड के प्रतापनगर क्षेत्र के गांव खिल्लांवाला के सीनियर सेकेंडरी विद्यालय का है। इस स्कूल का परिणाम 30 प्रतिशत से भी कम है। बैठक में निदेशक व शिक्षा मंत्री ने परिणाम कम आने का कारण पूछा। इस दौरान उत्कृष्ट परिणाम देने वाले दो स्कूलों के मुखियाओं को भी बुलाया गया था। जिले के बाकरवाला और जठलाना विद्यालय का दसवीं का परिणाम शत-प्रतिशत रहा। शत प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूलों के मुखियाओं से परीक्षा के दिनों में अपनाई रणनीति के बारे जानकारी ली गई।
गौरतलब है कि जिले के तीन स्कूल ऐसे हैं जिनका परिणाम बेहद कम है। इसमें 12वीं का कम परिणाम देने वाले दो और दसवीं का कम परिणाम देने वाला एक स्कूल शामिल है। हालांकि मुख्यालय द्वारा केवल खिल्लांवाला स्कूल के मुखिया को ही बुलाया गया था। कम परिणाम देने में खिल्लांवाला प्रदेश के पहले दस स्कूलों में शामिल है। वहीं, जठलाना व बाकरवाला स्कूल उत्कृष्ट परिणाम देने में प्रदेश के पहले दस स्कूलों में शामिल है। इस दौरान खिल्लांवाला मुखिया ने बताया कि खिल्लांवाला स्कूल में चार विषयों के अध्यापक ही नहीं थे। दूसरे विषय के शिक्षक अपने स्तर पर ही विद्यार्थियों की तैयारी करवा रहे थे। यही कारण है कि खिल्लांवाला का परिणाम सबसे कम है।
इस बार सबसे कम परिणाम देने वाले करीब 125 स्कूलों की सूची हरियाणा बोर्ड ने तैयार की थी। बोर्ड ने यह सूची निदेशालय भिजवाकर इस पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। बोर्ड की इस सूची में खिल्लांवाला का नाम पहले दस विद्यालयों के नाम में शामिल है।
इन स्कूलों का परिणाम सबसे खराब
प्रतापनगर के गांव खिल्लांवाला के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से दसवीं के कुल 61 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें 29 लड़के और 32 लड़कियां शामिल थीं। इस स्कूल के 61 में से मात्र 24 विद्यार्थी ही पास हुए हैं। जिसमें लड़कों की संख्या आठ और लड़कियों की संख्या 16 है। हर बार की तरह इस बार भी परीक्षा में लड़कियों ने बाजी मारी है। इस स्कूल की 50 प्रतिशत लड़कियां फेल हो गईं हैं। इसी तरह छछरौली खंड के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रतापनगर का परिणाम मात्र 41 प्रतिशत है। इस स्कूल से विभिन्न संकायों से कुल 114 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। जिसमें से मात्र 47 छात्राएं ही पास हो पाई हैं। स्कूल का परिणाम 41.22 प्रतिशत है जो बोर्ड परिणाम से 44.44 प्रतिशत कम है। इसी तरह छछरौली खंड का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अरईयावाला का परिणाम भी कम है। इस स्कूल का परिणाम 44 प्रतिशत आया है। स्कूल से 13 लड़कों और 19 लड़कियां कुल 32 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा में पांच लड़के ही पास हुए हैं। जबकि उत्तीर्ण लड़कियों की संख्या मात्र नौ है। स्कूल के 32 में से सिर्फ 14 विद्यार्थी पास हुए हैं। इस स्कूल का परिणाम 44 प्रतिशत है जो बोर्ड से 41.44 प्रतिशत कम है। इसी तरह इन दोनों स्कूलों का दसवीं का परिणाम भी कम है। इसी तरह खिल्लांवाला स्कूल का परिणाम बेहद कम रहा।
बोर्ड की परीक्षा कम और उत्कृष्ट परिणाम देने वाले प्रदेश भर में पहले दस स्थान पर आए स्कूलों के मुखियाओं को मुख्यालय बुलाया गया था। कम परिणाम देने वाले खिल्लांवाला स्कूल में चार विषयों के शिक्षक नहीं थे। इसके अलावा जठलाना व बाकरवाला स्कूल को शत-प्रतिशत परिणाम देने पर बुलाया गया था। इसके लिए निदेशालय की ओर से निर्देश दिए हैं। इसके सुधार की दिशा में काम किया जा रहा है। - धर्मेंद्र चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी।