संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिले में गर्भवतियों की डिलीवरी के आंकड़े सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हालात यह हैं कि सरकारी अस्पतालों में चक्कर और रेफरल से परेशान गर्भवतियां मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं। यही वजह है कि जिले में सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों में कहीं ज्यादा डिलीवरी हो रही हैं।
पांच मंजिला और 200 बेड क्षमता वाला मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल कहने को तो जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन डिलीवरी के मामलों में यह छोटे अस्पतालों से भी पीछे है। बीते वर्ष 2025 में पूरे साल में यहां मात्र 2206 डिलीवरी दर्ज की गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी, जहां संसाधन और जगह दोनों सीमित हैं, वहां इसी अवधि में करीब 4681 डिलीवरी हुईं।
वहीं जिले के निजी अस्पतालों में सालभर में करीब 11303 डिलीवरी हो रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में गायनी डॉक्टरों की तैनाती के बावजूद गर्भवतियों को यहां से जगाधरी अस्पताल रेफर किया जाना आम बात बन गई है। जगाधरी स्थित उप जिला अस्पताल में पहले ही बेड और जगह की भारी कमी है।
कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि एक ही बेड पर दो-दो गर्भवतियों को लिटाना पड़ता है। ऐसी अव्यवस्था देखकर परिजन जोखिम लेने के बजाय निजी अस्पतालों को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इसी दौरान सीएचसी छछरौली में 162, नाहरपुर सीएचसी में 80, प्रतापनगर में 591, रादौर में 215, साढौरा 117, सरस्वतीनगर में 60 व व्यासपुर में 233 डिलीवरी हुई हैं।
सीएचसी से ही बना देते हैं डर का माहौल
ग्रामीण क्षेत्रों में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। यहां डिलीवरी कराने से स्टाफ बचता नजर आता है। गर्भवती महिला को लेकर परिजन जैसे ही प्रसव पीड़ा में सीएचसी पहुंचते हैं, उसे एंबुलेंस से नीचे उतारे बिना ही सीधे जगाधरी या यमुनानगर अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। तर्क दिया जाता है कि सीएचसी में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही डॉक्टर। स्टाफ की ओर से यह कह कर परिजनों को डरा दिया जाता है कि यदि मां या बच्चे को कुछ हो गया तो जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी। इस डर और असमंजस की स्थिति में परिजन सीधे प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर लेते हैं। जहां उन्हें तुरंत इलाज, डॉक्टर की उपलब्धता और बेहतर सुविधाओं का भरोसा मिलता है, भले ही इसके लिए उन्हें 10 से 20 हजार रुपये की भारी रकम चुकानी पड़े।
वर्जन:
सभी सीएचसी से लेकर उप व जिला नागरिक अस्पताल में गर्भवतियों की डिलीवरी की मुफ्त सुविधा है। गर्भवतियों को मुफ्त एंबुलेंस की भी सुविधा दी जा रही है। यदि डिलीवरी को लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है तो जांच कराई जाएगी। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।