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Yamuna Nagar News: भजनों से गुरु, ईश्वर की महिमा का किया गुणगान

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हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी अंजू भारती ने प्रवचन किया। इस दौरान उन्होंने गुरु रविदास महाराज के जन्मदिवस व उनकी शिक्षाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास का जन्म 1376 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के जिला बनारस में हुआ था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता हित व कल्याण को समर्पित कर दिया। गुरु रविदास उन आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छू चुके थे, जहां उनका आभामंडल इतना दिव्य एवं प्रबल हो चुका था कि उनकी महिमा चारों और फैल गई। घर घर उनकी जय जयकार होने लगी। गुरु रविदास ने परमात्मा ज्ञान, ध्यान और सत्य प्रचार के लिए मानव जाति को जागृत किया। बिना भेदभाव प्राणी मात्र को गले लगाया। उन्होंने मानव समाज को सांसारिक क्षणभंगुरता से हटाकर प्रभु प्रेम की तरफ लगाया। उन्होंने कहा कि संत महापुरुष जब जब धरती पर आते हैं, तो वे उस वैद्य की तरह मनुष्यता का इलाज करते हैं। इसी प्रकार संत महापुरुष स्वस्थ समाज का निर्माण करने व फैली कुरीतियों, दूषित विचार धारा को ज्ञान से नष्ट कर देते हैं। गुरु रविदास ने समझाया है कि व्यक्ति की महानता उसकी जाति, पद या कुल से नहीं होती बल्कि उसके विचारों और कर्मों से होती है। कर्म के पीछे छुपी भावना ही मनुष्य का व्यक्तित्व निर्धारित करती है। राजा पीपा, रानी झाला बाई व रानी मीरा बाई को गुरु रविदास ने ब्रह्मज्ञान से ईश्वर दर्शन अंतर्घट में करवा दिए। गुरु रविदास अपने समय के पूर्ण ब्रह्मज्ञानी महापुरुष थे। उन्होंने मोह, निद्रा में सोई आत्माओं को जागृत किया और उन्हें प्रभु प्रेम से जोड़ दिया। गुरु रविदास द्वारा समाज को दी शिक्षाएं हमारे जीवन के लिए मील पत्थर हैं। उन्होंने कहा कि गुरु मनुष्य को इस मोह सागर से मुक्त करवाने के लिए आते हैं। मनुष्यों के लिए वे इस संसार में विभिन्न कष्ट सहते हैं, ताकि अज्ञान के फेर में फंसे मनुष्य को मुक्त करवा सकें।
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