कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की आवाज केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही नहीं सुन रही है, लेकिन किसानों की आवाज को और बुलंद करने के लिए विदेशों में रह रहे भारतीय लोगों का समर्थन मिल रहा है।
इटली में रहने वाले किसान कर्ण जीत सिंह ने सरकार से तीनों कानून वापस लेने की मांग की है। इटली से भेजे एक संदेश में किसान कर्णजीत सिंह कडकौली ने कहा कि सरकार केवल पूंजीपतियों और साहूकारों की कठपुतली बन कर रह गई है। यदि सरकार किसान-मजदूर और कमजोर वर्ग की अनदेखी करेगी तो उसका पतन हो जाएगा। यही नहीं इटली से भेजे संदेश में उन्होंने जगाधरी विधायक एवं प्रदेश कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर के उस बयान की निंदा की। जिसमें शिक्षा मंत्री ने किसान आंदोलन को 15 से 20 दिनों में बिखर जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि सरकार इसे किसानों का कानून बता रही है, लेकिन जब किसान ही इसे नहीं मान रहे हैं, तो सरकार इसे क्यों थोपना चाहती है। सरकार को किसानों की मांगों को मानकर तुरंत कानून वापिस लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह किसान आंदोलन अब तीनों कानूनों को रद्द करवा कर ही रुकेगा।
कर्णजीत ने कहा कि सरकार ने तीनों बिल पास करने से पहले ही हरियाणा, पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों में हजारों एकड़ में अनाज भंडारण के गोदाम बनाने शुरू कर दिए थे। जिससे स्पष्ट है कि सरकार पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुष्यंत चौटाला ने किसानों के नाम पर वोट मांगे थे, लेकिन अब किसानों के हालात पर चुप्पी साधे हुए हैं। पिपली में हुए लाठीचार्ज को भी गृहमंत्री अनिल विज ने यह कहकर इनकार कर दिया था कि यहां पर कोई लाठीचार्ज नहीं हुआ। इसका नतीजा यह रहा कि पंजोखरा गांव जो कि अनिल विज ने गोद लिया था। वहां पर लोगों ने उसको घुसने तक नहीं दिया।