तीन कृषि कानूनों को वापस न लेने के विरोध में वीरवार को जिले के किसानों ने लघु सचिवालय के समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शव यात्रा निकाली। किसान प्रधानमंत्री की शवयात्रा जिला सचिवालय लेकर पहुंचे और उपायुक्त को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर युवा किसानों ने जिला उपायुक्त के सामने सड़क पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले का दाह संस्कार किया।
बतां दे कि बीती 27 नवंबर से किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। किसान आंदोलन को 22 दिन बीत चुके हैं। लेकिन कृषि कानूनों को लेकर अभी तक सरकार के साथ किसानों की बातचीत विफल रही है। इसी कड़ी में जिले के युवा किसानों ने एकत्रित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले की शव यात्रा निकाली और वह शहर के मेन रोड से यात्रा निकालते हुए जिला सचिवालय पर पहुंचे और प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही उन्होंने उपायुक्त को राष्ट्रपति नाम ज्ञापन सौंपा। युवा किसान नेताओं का कहना था कि सरकार मानने को तैयार नहीं है। अन्नदाता 22 दिन से कड़ाके की ठंड में सड़क पर पड़ा है। लेकिन देश के प्रधानमंत्री के पास उनके लिए वक्त नहीं है। जबकि उन्हें बड़े-बड़े उद्योग पतियों से मिलने का समय मिल जाता है। उनका कहना था कि आखिर क्यों अन्नदाता की इतनी दुर्गति की जा रही है। इन कानूनों के लागू होने से पहले ही देशभर के किसान इनके विरोध में उतर आए थे। लेकिन जब से यह कानून केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए हैं तब से किसानों ने आंदोलन तेज कर दिए हैं और वे शांतिपूर्ण तरीके से सरकार को मनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने ज्ञापन में मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द तीन कृषि कानूनों को रद्द करें।