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कृषि संबंधी तीन कानूनों के विरोध के लिए किसान रवाना

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pradarsan - फोटो : Yamuna Nagar
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भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में वीरवार को सैकड़ों किसान, आंदोलन में भाग लेने के लिए दिल्ली के लिए रवाना हुए। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार ने देश के किसानों व मजदूरों पर खेती व किसान विरोधी कानून लागू करके बड़ा हमला किया है। प्रदेश की भाजपा- जजपा गठबंधन द्वारा भी आंदोलनकारी किसानों को गुमराह बताकर बदनाम किया जा रहा है। जो बेहद गलत है।
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उन्होंने कहा कि देश प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी के ऊपर दुश्मनों की तरह हमला किया जा रहा है। सड़क तोड़ी गई, आंसू गैस के गोले व लाठियां बरसाई जा रही हैं। किसानों को जेल में डाला गया है। उन्होंने बताया कि लाठी, डंडे व आंसू गैस के गोले बेरीकेड से अब किसान रुकने वाला नहीं है। भले ही सरकार जितने कठोर कदम उठाले किसान सिर पर कफन बांध कर आरपार की संघर्ष करने को तैयार है। इस संघर्ष में जीत किसान की ही होगी। किसानों के हौसले बुलंद हैं और वह पूर्णता शांतिपूर्ण तरीके से अपने आंदोलन को अंजाम दे रहे हैं। सरकार ने किसानों को बरगलाने, उलझाने व बांटने की पूरी कोशिश की, लेकिन किसान की एकजुटता को कम नहीं कर पाई। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक संगठनों जिसमें बार एसोसिएशन, बिजली विभाग, रोडवेज यूनियन उन सभी का धन्यवाद किया। जिन्होंने इस किसान आंदोलन में अपना समर्थन किया। उन्होंने बताया कि आज एक जत्था रादौर, बिलासपुर व छछरौली से रवाना हुआ। इस अवसर पर जयपाल चंमरोडी जिला उपाध्यक्ष, उदयसिंह कुंजल प्रधान रादौर, बजिंदर सिंह राणा प्रधान सरस्वती नगर, सतवीर सिंह, प्रदीप राणा, साहब सिंह, सुभाष, राजेश, धर्मवीर, गुरदयाल सिंह, रघुवीर सिंह, ओमप्रकाश, सुशील, सतनाम, राजेश शर्मा, मांगेराम मसाना जट्टान मौजूद रहे।
आंसू गैस भी किसानों के हौसले तोड़ नही पाए है। मंच के माध्यम से गांव गांव जाकर किसानों व ग्रामीणों से किसान कानून के विरोध में प्रस्ताव पारित करके डीसी से राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे। इस दौरान संजीव वालिया, गुलजार सिंह मलिक मौजूद रहे।
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केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए कृषि कानूनों के विरोध में मुंडाखेड़ा गांव से आंदोलन में हिस्सा लेने गए। जाने से पूर्व गांव में एकत्रित हुए किसानों ने प्रदेश व देश की सरकारों के खिलाफ रोष प्रकट किया।
किसान मोहन लाल प्रधान, जीवन सिंह, मामराज, रतन सिंह, दलजीत, रामकुमार राणा, भगवान दास व अन्य किसानों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने जोर जबरदस्ती से किसानों के ऊपर काले कानून थोप दिए हैं। जिसका भविष्य में किसानों को बहुत नुकसान होने वाला है। केंद्र सरकार मंडी सिस्टम खत्म करना चाहती है। जिससे किसान की हालत और खराब होने वाली है। उन्होंने कहा कि देश के किसान पहले ही कर्जे में दबे हुए हैं और किसानों की आत्महत्या के मामले भी देश में बढ़ते जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने जोर जबरदस्ती से कृषि कानून बनाकर किसानों के ऊपर थोप दिए हैं। पूरे देश का किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहा है। जिसको लेकर 26 नवंबर से किसान अपने गांव से निकलकर दिल्ली की तरफ जा रहे हैं। किसान शांतिपूर्ण तरीके से बनाए गए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार किसानों की बात सुनने की बजाए अपने हक के लिए दिल्ली जा रहे किसानों पर अत्याचार कर रही है। दिल्ली सिंघु बॉर्डर पर इस समय हरियाणा और पंजाब के लाखों किसान अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। मुंडा खेड़ा गांव से किसान दिल्ली में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे किसान भाइयों का साथ देने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।
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