किसानों के समर्थन में सामाजिक संगठन भी सड़क पर उतर आए हैं। इसी कड़ी में रविवार को शहर की आगाज संस्था ने मानव श्रृंखला बनाकर किसान आंदोलन का समर्थन किया और सरकार से उनकी मांगे मानने का अनुरोध किया। इस दौरान अध्यापकों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों, उद्योगपतियों, गृहणियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों ने नेहरू पार्क पर एक दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई।
संस्था अध्यक्ष बलबीर सिंह ने बताया कि देशभर में जो किसान आंदोलन चल रहा है, उससे जाहिर होता है कि कृषि कानून किसान हितेषी नहीं, बल्कि किसान विरोधी है। चूंकि अगर एक या दो किसान संगठन इनका विरोध कर रहे होते तो कहा जा सकता था कि यह राजनीतिक अड़ंगा है। लेकिन देशभर से करीब 500 बड़े किसान संगठन इन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। जिससे स्पष्ट हो जाता है कि यह कानून कृषि व कानून विरोधी है।
गौरव चौधरी ने कहा कि किसान को उसकी फसल का पूरा दाम नहीं मिलेगा तो उसे खेती किसानी छोड़ना पड़ेगा और वह काम की तलाश में शहर की तरफ पलायन करेंगे। जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी इसलिए युवा वर्ग इस कृषि कानून का खुलकर विरोध कर रहा है। वहीं देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।
व्यापारियों का नेतृत्व कर रहे हैं राजेश बिंद्रा ने कहा कि अगर किसान की जेब में रुपये नहीं पहुंचेंगे तो उसके क्रय करने की क्षमता घट जाएगी। जिससे वह बाजार में खरीदारी के लिए नहीं निकलेगा और व्यापारियों को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।
गृहणियों का नेतृत्व कर रही हरविंदर ढिल्लो ने कहा कि घर में जितना भी सामान आता है वह खेती किसानी से जुड़ा हुआ है। जब किसान को भारी नुकसान होगा तो वह खेती किसानी छोड़ देगा। अगर खेती खेती किसानी कारपोरेट के हाथों में चली गई तो रसोई का खर्च बढ़ जाएगा और घर को चलाना मुश्किल हो जाएगा।
अध्यापकों का नेतृत्व कर रहे अनुरोध ने बताया कि अध्यापक का कार्य सच पढ़ना और सच का प्रचार प्रसार करना है। देश में 65 प्रतिशत जनता खेती किसानों पर निर्भर है। इस 65 से 70 प्रतिशत जनता इन कृषि कानूनों के नीचे दबने कि स्थिति में है।
वकीलों का नेतृत्व कर रहे साहिल शर्मा ने कहा कि कृषि कानून को देखकर ही लगता है कि इसमें किसानों के हित के लिए कुछ नहीं है यह पूंजीपतियों को बढ़ावा देने और खेती किसानी को उनके कब्जे में करवाने के कानून है।
कार्यक्रम के कोआर्डिनेटर सुमित पाल सिंह ने कहा कि इन कृषि कानून का विरोध सिर्फ पंजाब हरियाणा ही नहीं पूरे देश के किसान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ग व क्षेत्र के लोग किसानों का समर्थन कर रहे हैं।