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कृषि अध्यादेशों के खिलाफ गल्ला कारोबार बंद, बेमियादी हड़ताल शुरू

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pradarsan - फोटो : Yamuna Nagar
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कृषि अध्यादेशों के विरोध व किसानों के समर्थन में आढ़ती एसोसिएशन भी उतर गई है। इसके लिए एसोसिएशन के बैनर तले आढ़ती भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जिस कारण मंडियों का काम काज ठप हो गया। वहीं दूसरी तरफ मंडियों में धान की आवक भी शुरू होने को है। ऐसे में आढ़तियों की हड़ताल सरकार के साथ किसानों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है। जिले की 11 मंडियों के सात सौ से ज्यादा आढ़ती हड़ताल पर हैं।
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आढ़तियों की मांग है कि तीनों कृषि अध्यादेश तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाए। आढ़तियों की बकाया पेमेंट तुरंत उनके खातों में डाली जाए। आढ़तियों की हड़ताल के बाद हजारों मजदूर बेरोजगार पड़े हैं, जो मंडियों में काम करते थे। वहीं फसल खरीद न होने के बाद किसानों की चिताएं और अधिक बढ़ गई हैं। हड़ताल और किसान आंदोलन को कामयाब बनाने के लिए एसोसिएशन पदाधिकारी लगातार बैठकें कर लोगों को साथ जोड़ रहे हैं। अनाजमंडी आढ़ती एसोसिएशन जिला प्रधान शिव कुमार ने बताया कि यह तीनों अध्यादेशों से किसानों व आढ़तियों का वजूद खत्म हो ही जाएगा। वहीं देश की जनता भी इस कानून के आगे दम तोड़ती नजर आएगी। पूंजीपति व कंपनियां ही मालिक होगी। फसल का कंपनियां मनचाह समर्थन मूल्य दाम निकालेगी। उन्होंने कहा कि किसानों से जबरन औने पौने दामों में फसल खरीद कर आसमानी भाव पर आनाज बेचा जाएगा। महंगाई इतनी हो जाएगी कि अनाज व सामान आम व गरीब आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा। ऐसा हरगिज नहीं होने दिया जाएगा।
फार्मर प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स अध्यादेश में मंडी के बाहर फसल बेचने पर मार्केट फीस व अन्य किसी भी नाम से कोई फंड या टैक्स आदि लगाने पर पाबंदी है। जबकि मंडी के अंदर यह जारी रहेंगे। यह बिल्कुल अनुचित हैं। एक देश दो विधान का विरोध करने वाली पार्टी स्वयं इसे लागू कर रही है। टैक्स, फीस, फंड आदि माल की कीमत में बढ़ौतरी करते हैं, ऐसे में मंडी का व्यापारी बाहर के व्यापारी से प्रतिस्पर्धा करेगा। इसलिए मंडी और बाहर एक जैसे टैक्स, फीस, फंड आदि का प्रवधान होना जरूरी है।
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शुरू से ही सभी फसलों की खरीद और पेमेंट आढ़ती करते थे। अब सूरजमुखी, सरसों, सीसीआई कपास आदि अनेक फसलें सरकार आढ़तियों को दरकिनार कर खरीद सीधे किसान से करती है। जिसका किसानों ने भी आढ़तियों के साथ विरोध किया। आढ़ती 2.5 दामी लेकर मंडी में किसान की फसल ट्राली से उतारने, साफ करने, उसकी फसल की बोली करवाकर प्रतिस्पर्धा में अधिकतम रेट पर बिकवाने का काम करते हैं। उनका दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, फसल सफाई के झरने, पीपे, पंजी आदि का इंतजाम भी आढ़ती करते रहे हैं।
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