यमुनानगर। जिले की अनाज मंडियों में मंगलवार को भी पोर्टल की धीमी रफ्तार ने किसानों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ाए रखी। गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते गेट पास बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। हालात यह रहे कि कर्मचारियों को कई बार ऑनलाइन के साथ-साथ मैनुअल तरीके से भी गेट पास काटने पड़े, ताकि मंडियों में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रालियों को अंदर भेजा जा सके।
एक दिन पहले पोर्टल में बायोमीट्रिक प्रणाली ठप होने से गेट पास नहीं बन पा रहे थे, जिससे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा था। आक्रोशित किसानों ने जगाधरी, रादौर और व्यासपुर मंडियों के बाहर जाम लगाकर विरोध जताया था। हालांकि मंगलवार को स्थिति कुछ हद तक संभली, लेकिन पोर्टल की धीमी गति ने कामकाज को पूरी तरह पटरी पर नहीं आने दिया। इस बीच मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ने से जगह की कमी भी महसूस की जा रही है। उठान की गति बेहद धीमी होने के कारण खरीदा गया गेहूं मंडियों में ही अटका हुआ है। अब तक जिले की मंडियों में 90854 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जिसमें से 63594 मीट्रिक टन की खरीद की गई है लेकिन उठान केवल 12653 मीट्रिक टन ही हो पाया है, जो कुल खरीद का लगभग 20 प्रतिशत है। ऐसे में मंडियों में जगह कम पड़ने लगी है और किसानों को अपनी उपज उतारने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
खरीद एजेंसियों की बात करें तो खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 19618.4 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 32595.3 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा 11380.4 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदा गया है। बावजूद इसके उठान की धीमी रफ्तार व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। जिले की विभिन्न मंडियों में खरीद का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। व्यासपुर मंडी में 9958 मीट्रिक टन, छछरौली में 5247.3 मीट्रिक टन, गुमथला राव में 668 मीट्रिक टन, जगाधरी में 12447 मीट्रिक टन, जठलाना में 487 मीट्रिक टन, खारवन में 984 मीट्रिक टन, प्रतापनगर में 3619.4 मीट्रिक टन, सरस्वतीनगर में 15557 मीट्रिक टन, रादौर में 5170 मीट्रिक टन, रणजीतपुर में 2711 मीट्रिक टन, रसूलपुर में 1947 मीट्रिक टन और साढौरा में 4798 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।
किसान मंदीप सिंह, फूल चंद का कहना है कि एक तरफ उन्हें समय पर फसल बेचने की चिंता सता रही है, वहीं दूसरी ओर पोर्टल की खराब व्यवस्था और धीमा उठान उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। कई किसानों को अपनी ट्रालियां घंटों तक मंडी के बाहर खड़ी रखनी पड़ रही हैं। वहीं डीएफएससी नितिश सिंगला का कहना है कि पोर्टल से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को जल्द दूर किया जा रहा है। उठान की गति बढ़ाने के लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं।