संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक तोरांवाला तालाब और गगड़वाला तालाब के जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण कार्यों का जायजा लेने मंगलवार को विजिलेंस की टीम साढौरा पहुंची। एससी विजिलेंस क्वालिटी कंट्रोल, पंचायती राज की टीम ने दोनों तालाबों का स्थलीय निरीक्षण किया और संबंधित विकास कार्यों से जुड़े सरकारी दस्तावेजों की बारीकी से जांच-पड़ताल शुरू की। करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था,
दोनों तालाबों के सौंदर्यीकरण का कार्य करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक अधूरा पड़ा है। ऐसे में विजिलेंस टीम का मौके पर पहुंचकर जांच करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राचीन तोरांवाला तालाब के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण परियोजना पर लगभग सवा दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जानी थी। वहीं दूसरी ओर, प्राचीन गगड़वाला तालाब के पुनरुद्धार कार्य के लिए करीब 47 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि परियोजना पूरी होने से क्षेत्र के जल स्रोतों का संरक्षण होगा और सौंदर्य बढ़ेगा, लेकिन दोनों ही स्थलों पर काम अभी तक अधर में लटका हुआ है।
दस्तावेजों के बाद होगा भौतिक सत्यापन
निरीक्षण करने पहुंची विजिलेंस टीम के इंचार्ज प्रेम सिंह राणा ने बताया कि पॉन्ड अथॉरिटी की ओर से ही उन्हें इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करने के लिए अधिकृत किया गया है, जिसके तहत टीम ने साढौरा पहुंचकर जांच शुरू की है। टीम ने दोनों तालाबों का मौका मुआयना कर लिया है और अब संबंधित फाइल व दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया में यह पता लगाया जाएगा कि दोनों कार्यों के लिए कितनी ग्रांट जारी की गई थी और सरकारी रिकॉर्ड में काम का क्या ब्योरा दर्ज है। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही धरातल पर हुए वास्तविक कार्यों की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। वहीं विजिलेंस टीम की इस कार्रवाई और तालाबों के निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर जब नगर पालिका सचिव नितिन वश्त से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।