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प्रदूषण ने तोड़ा रिकार्ड, दोपहर 12 बजे एक्यूआई 420 तक पहुंचा

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सर्दी बढ़ने के साथ ही ट्विनसिटी का प्रदूषण भी चरम पर पहुंच गया है। मौसम में नमी के कारण शहर की आबोहवा में जहर और घुल गया है। तीसरे दिन भी यमुनानगर रेड जोन से बाहर नहीं निकल पाया है। कोहरा के साथ-साथ प्रदूषण भी लोगों पर दोहरी मार कर रहा है। सोमवार को यमुनानगर उत्तर भारत के सबसे प्रदूषिण शहरों में सबसे ऊपर आ गया। दोपहर 12 बजे एक्यूआई 420 दर्ज किया गया। साथ लगते शहरों की करें तो अंबाला का एक्यूआइ 225, करनाल का 221 दर्ज किया गया। जबकि सबसे प्रदूषित शहर नई दिल्ली का एक्यूआइ 324 दर्ज किया गया। नोएडा का 353, गुरुग्राम का 265, फरीदाबाद का 284 दर्ज किया गया। लोगों का आरोप है कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए स्टेट प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार रात आठ बजे भी पीएम 2.5 का स्तर 397 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब है। जिससे ठंड के साथ प्रदूषण के कारण दोहारी मार लोगों को झेलनी पड़ रही है। वातावरण में कोहरे के कारण स्मॉग भी आसमान में नहीं पहुंच रहा है। जनवरी तक मौसम में नमी के चलते पीएम-10 की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद नहीं है। शहर एक सप्ताह तक येलो जोन में रहने के बाद फिर रेड जोन में आने से आबोहवा दूषित हो गई है। प्लाईवुड इंडस्ट्री, बर्तन की भट्टी व सीवर लाइन की खुदाई के कारण धूल के कण वातावरण में बने हुए हैं। नमी के कारण हवा भारी होने से कण ऊपर नहीं जा रहे। विशेषज्ञों की मानें तो गर्मी के हवा हल्की होती है, जिससे कण ऊपर चले जाते हैं। नगर निगम ने एक महीने पहले पानी का छिड़काव पूरे शहर में कराया था। लेकिन, अब उसने भी छिड़काव बंद कर दिया है। शहर में सीवर लाइन खुदाई का काम चल रहा है। इससे भी वाहनों के चलने से धूल के कण उड़ रहे हैं। यही कारण है कि शहर में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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0 और 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा , 51 और 100 के बीच संतोषजनक , 101 और 200 के बीच मध्यम , 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच बहुत खराब और 401 और 500 के बीच गंभीर माना जाता है।
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