दिवाली से पहले शहर की हवा को प्रदूषण का ग्रहण लग गया है। हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जिससे लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। आंखों में हो रही जलन ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है। 15 दिनों से लोग गला दर्द व जुकाम से ज्यादा परेशान हैं। शाम होते ही सड़कों पर स्मॉग सा छाने लगता है जिसमें सामने कुछ भी साफ-साफ दिखाई नही देता। दो दिनों से तो शहर में एक्यूआई का स्तर 250 से ऊपर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि दिवाली तक यह 350 माइक्रोग्राम तक पहुंच जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्र में खेतों में पराली का जलाया जाना भी शहर में बढ़ते प्रदूषण का बड़ा कारण है। हवा के साथ पराली जलाने से बढ़ता धुआं शहर में आ रहा है। हालांकि गत वर्ष से पराली के मामले इस बार काफी कम हैं। अभी तक पराली जलाने के 73 मामले पकड़ में आ चुके हैं। पराली जलाने वाले किसानों पर कृषि एवं कल्याण विभाग की तरफ से 2500 रुपये प्रति एकड़ की दर से जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा शहर में जलाया जा रहा कूड़ा व सड़कों पर वाहनों के टायरों से उड़ती धूल भी प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। हवा में घुल रहे धूल के कण सांस के माध्यम से शरीर में जाकर लोगों को बीमार कर रहे हैं। धूल के कण गले में जमने से गला दर्द के मरीज भी बढ़ रहे हैं।
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विपुल गाेयल का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने का असर आंखों पर भी पड़ता है। इससे आंखों में जलन होती है। जलन होने पर आंखों को मथना नहीं चाहिए। साफ पानी से दिन में कई बार आंखों को धोना चाहिए। यदि आंखों में ज्यादा दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
25 अक्तूबर 157
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01 नवंबर 182
02 नवंबर 273
03 नवंबर 250
0 से 100 - अच्छा
101 -200 - सामान्य
201-300- खराब
301-400 - बहुत खराब
401-500- बहुत ज्यादा खतरनाक