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कागजों में ही उलझी रहीं सीएम की घोषणाएं

Mon, 26 Oct 2015 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
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प्रदेश में भाजपा सरकार का एक साल पूरा हो चुका है। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने 365 दिन में कई बार जिले का आगमन किया और क्षेत्र के लिए घोषणाएं कीं लेकिन इनमें से एक-दो घोषणाओं पर ही काम हो पाया है, कई घोषणाओं को अभी अमलीजामा पहनाया जाना बाकी है। इसके अलावा जिलावासियों की कई मांगें अब भी ठंडे बस्ते में हैं, जिन पर भाजपा सरकार के एक साल के दौरान काम नहीं हो पाया है। भाजपा सरकार के एक साल के कार्यकाल में हुए कामों पर लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी।
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14 दिसंबर को सीएम ने ये की थीं घोषणाएं
यमुनानगर में ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना।
यमुनानगर और जगाधरी शहर के बीच रिंग रोड का निर्माण। यमुनानगर के खजूरी रोड का नवनिर्माण।
यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम में कर्मचारियों की भर्ती।
पॉप्लर-सफेदा लक्कड़ मंडी का निर्माण।
खिजराबाद को तहसील का दर्जा।
खिजराबाद में 33 केवी सब पावर स्टेशन का निर्माण।
रादौर में सरकारी कॉलेज की स्थापना।
साढौरा में सरकारी कॉलेज की स्थापना।
बिलासपुर में बस स्टैंड का निर्माण।

घोषणा पर क्या कुछ हुआ
कई दशक से चल आ रही ट्रांसपोर्ट नगर स्थापित करने की  मांग पर सीएम ने इसे पूरा करने की घोषणा की, बावजूद इसके इस पर काम नहीं हो पाया है। फिलहाल कागजी कार्रवाई ही चल रही है और जगह का चयन किया जाना है। ट्रांसपोर्ट नगर की मांग पूरी न होने से एचएच-73 (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) के दोनों ओर खड़े सैकड़ों ट्रक जाम व हादसों की वजह बन रहे हैं।

सीएम द्वारा घोषित यमुनानगर व जगाधरी के लिए रिंग रोड निर्माण पर कागजी कार्रवाई चल रही है, जबकि धरातल पर काम किया जाना बाकी है। रिंग रोड न होने से साथ लगते राज्यों से आने-जाने वाले वाहन चालक भी शहर से होकर गुजरते हैं, जिससे शहरी सड़कों पर ट्रैफिक के दबाव से जाम के साथ हादसों का ग्राफ भी बढ़ता है। इसी कारण यह मांग की गई, किंतु अभी तक यह पूरी नहीं हुई।
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यमुनानगर के खजूरी रोड के नवनिर्माण की घोषणा के बाद से ही इस पर काम शुरू कर दिया गया। इसके लिए टेंडर व वर्क अलॉट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाना है। बता दें कि खजूरी रोड के खस्ताहाल होने व यहां निकासी चौपट से करीब दो दशक से दर्जनों गांवों सहित मार्ग से आने-जाने वाले लोग परेशान थे, इस कारण इसके नवनिर्माण की मांग की गई थी।

पॉप्लर-सफेदा लक्कड़ मंडी के निर्माण की घोषणा के बाद प्रशासन व व्यापारियों के बीच बातचीत में ही एक वर्ष का समय गुजर गया। सहमति न बन पाने से लंबे अर्से से जारी यह मांग भी पूरा नहीं हो पाई है। बता दें कि पौंटा हाईवे पर जगाधरी के अग्रसेन चौक से बुड़िया चुंगी और यमुनानगर में कुरुक्षेत्र-सहारनपुर एनएच-73 पर पुराना हमीदा से पांसरा तक टिंबर उद्योग से जुड़ी सैकड़ों छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। इसके कारण सुबह-शाम मार्ग पर लकड़ी से लदे भारी वाहनों की आवाजाही से जाम की समस्या रहती है।

कागजों में ही अटकी ये घोषणाएं
यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम में कर्मचारियों की भर्ती, खिजराबाद को तहसील का दर्जा, खिजराबाद में 33 केवी सब पावर स्टेशन का निर्माण, रादौर व साढौरा में सरकारी कॉलेज की स्थापना व बिलासपुर में बस स्टैंड का निर्माण, ये घोषणाएं फिलहाल कागजी कार्रवाई में ही अटकी हैं। ये घोषणा अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं।

दो घोषणाओं पर काम, बाकी ठंडे बस्ते में
छछरौली। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अप्रैल में छछरौली आगमन किया था। दौरान के दौरान की गईं घोषणाएं सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही हैं। छछरौली अनाज मंडी में छह अप्रैल को कार्यक्रम में सीएम ने क्षेत्र के लिए दर्जनों घोषणाएं कीं। इनमें से एक-दो घोषणा पर तो काम चल रहा है, बाकी सभी घोषणाएं ठंडे बस्ते में चली गई हैं। सीएम द्वारा छछरौली-कोट सड़क निर्माण की घोषणा पर इसी माह विधानसभा स्पीकर कंवरपाल ने कार्य का उद्घाटन किया। इसके अलावा छछरौली अस्पताल को पीएचसी से बढ़ाकर सीएचसी नहीं किया जा सका है। सीएम द्वारा तहसील के गांव मलिकपुर में गो अभयारण्य, ताहरपुर कलां में महिला कॉलेज, छछरौली पंचायत को अनुदान,  छछरौली में आईटीआई, क्षेत्र की छोटी बड़ी दर्जनों सड़कें, छछरौली पावर हाउस की क्षमता बढ़ाने, खिजराबाद में बस स्टैंड, खिजराबाद को तहसील बनाने की घोषणाएं की थी  जिन पर अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।

बस स्टैंड, फोरलेन समेत कई कामा शुरू नहीं
रादौर। छह महीने पहले खट्टर की रादौर रैली में क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं की थीं, लेकिन आज तक एक भी घोषणा पूरी नहीं हुई। सीएम की घोषणा के अनुसार रादौर में तीन करोड़ रुपये की लागत से बस स्टैंड बनाया जाना था, जो बनना भी शुरू नहीं हुआ। अलीपुरा से यमुनानगर तक फोरलेन सड़क मार्ग के लिए 80 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। यह योजना भी शुरू नहीं हो पाई है।

सीएम की घोषणा अनुसार रादौर में सरकारी अस्पताल की क्षमता 50 बेड नहीं हो पाई है, वहीं अंटावा गांव में मंजूर किया गया स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं खुल पाया। रादौर क्षेत्र के पांच गांवों में कम्यूनिटी कम्यूनिटी सेंटर भी नहीं बन पाए। मुख्यमंत्री ने अनाजमंडी में सब्जी मंडी बनाने के लिए एक करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन आज तक मंडी नहीं बन पाई।

यमुना नदी के क्षेत्र में बिजली के बड़े टावर पोल लगाने के लिए भी एक करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, लेकिन आज तक पोल नहीं लग पाए। रादौर क्षेत्र की 50 सड़कों के लिए 18 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन अब तक यमुनानगर-गुमथला मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। इसके अलावा रादौर क्षेत्र की ग्रामीण सड़कें टूटी पड़ी हैं और कुछ सड़कों पर कार्य शुरू किया गया, लेकिन वह भी अधूरा पड़ा है।

टोपराकलां में 50 करोड़ रुपये से बनने वाला अशोका एडिक्ट पार्क का कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री ने रादौर में सीवर के लिए करोड़ों रुपये मंजूर किए, लेकिन आज तक सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो पाया।  

ये प्रोजेक्ट भी नहीं हो पाए पूरे
खट्टर की सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर जिले से जुड़े उन अहम प्रोजेक्ट पर भी काम नहीं हो पाया है, जिन्हें  लंबे अर्से से जिलावासी पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
शहर में 700 डेयरियां चल रही हैं, इन्हें रिहायशी क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए प्रशासन ने पांच स्थानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर डेयरी कांप्लेक्स बनाए थे। इसके लिए प्लांट भी आवंटित किए लेकिन आज भी शहर में सैकड़ों डेयरियां चल रही हैं।

ट्विनसिटी से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण करीब 2005 में शुरू हुआ। इसके बनकर तैयार होने पर यह सौ दिन भी सही तरह से नहीं चल पाया।

यमुनानगर-पंचकूला फोरलेन प्रोजेक्ट इस जिले के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसके तहत यमुनानगर और जगाधरी से गुजर रहे नेशनल हाईवे-73 को शहर से बाहर करने के लिए बाईपास का निर्माण भी किया जाना था। इससे शहरी सीमा में होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगता, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी बीते पांच वर्षों से अधर में है।

भले ही कई दशक से चली आ रही मांग पर जिले के मुख्य स्टेशन का नाम यमुनानगर-जगाधरी कर दिया गया, किंतु जिले की कई रेल परियोजनाएं अभी भी अटकी हैं। जगाधरी स्टेशन पर बने पैदल पुल को पुराना हमीदा तक पहुंचाने का काम ढाई साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है।

मॉडल स्टेशन की तर्ज पर जगाधरी रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं नहीं मिल पाईं, जबकि प्लेटफॉर्म नंबर-1 की लंबाई बढ़ाने की मांग ठंडे बस्ते में है। यहीं नहीं यमुनानगर वाया साढौरा चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र और पौंटा तक रेलवे लाइन कई दशक से एक सपना बनी हुई है।
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पुराना रादौर रोड रेलवे फाटक पर पर जाम से छुटकारा दिलाने के लिए अंडर या ओवरब्रिज की मांग पर भी काम नहीं हो पाया है।

सड़कों पर जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए यमुनानगर-जगाधरी में पार्किंग की अलग से व्यवस्था की जानी थी, जो आज तक नहीं हो पाई है।
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