पंचायत चुनाव पर फिलहाल रोक लगने से गांवों में चुनावी माहौल ठंडा पड़ गया है। लोगों में अभी भी संशय है कि शैक्षिक योग्यता की शर्त को लागू किया जाएगा या नहीं।
गांव की चौपालों में यही चर्चा है कि जो उम्मीदवार काफी समय से सरपंच, पंच, ब्लाक समिति व जिला परिषद के पद के लिए तैयारी कर रहे थे, उन्हें चुनाव स्थगित होने से नुकसान उठाना पड़ेगा। जबकि दूसरी ओर कुछ उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी कुछ दिन पूर्व ही चुनाव लड़ने की तैयारी की थी।
ऐसे में उन्हें पर्याप्त समय मिल जाएगा। चुनाव लड़ने का मन बना चुके उम्मीदवारों का कहना है उन्होंने तो चुनाव लड़ने के लिए पोस्टर व बैनर बनवा कर गांवों के मोहल्ले व चौक-चौराहों पर लगवा दिए थे। यदि चुनाव काफी आगे खिसके तो उनके लगाए बैनर, पोस्टर फट जाएंगे और उन्हें इन पर दोबारा खर्च करना पड़ेगा।
वही गांवों में चुनावों माहौल एक दम थम सा गया है। गांव के लोग दोबारा से अपने दैनिक कार्यों में लग गए हैं। साथ ही उम्मीदवारों की ओर से किया जा रहा चुनाव प्रचार व जन संपर्क भी लगभग बंद हो गया है। सबकी निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं। गांवों में अब चौपालों और बैठकों में लोग चुनाव को लेकर हो रही कानूनी लड़ाई पर चर्चा करते नजर आने लगे हैं।