पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यमुनानगर से जहां प्रदेश और केंद्र सरकार को घेरा, वहीं जिले के लोगों को ईमानदार और मेहनतकश बताया। उन्होंने कहा कि जिले के लोग एक बार जिसका हाथ पकड़ लेते हैं, उसका साथ कभी नहीं छोड़ते। हुड्डा ने कहा कि वे यहां अपना हाथ पकड़वाने और जिले के लोगों का हाथ पकड़ने के लिए आए हैं। हुड्डा ने कहा कि उन्हें मलाल है कि उन्हें यहां सात आठ पहले आ जाना चाहिए था।
हुड्डा ने शुक्रवार को जगाधरी अनाजमंडी में कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि अगले सीजन में शुगर मिल नहीं चली तो वे यहां आकर धरना-प्रदर्शन करेंगे और सरकार को मिल को टेकओवर करने के लिए बाध्य करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले यमुनानगर के कुछ किसान उनसे चंडीगढ़ में मिले थे और गन्ने की पेमेंट न होने तथा जीरी, पॉपुलर, कपास, बाजरा, आलू आदि के दाम घटने पर अपना दुखड़ा रोया था। किसानों ने उन्हें यमुनानगर आकर किसानों की समस्याओं को उठाने की बात कही थी। इसी कारण मैंने यहां आने का कार्यक्रम बनाया था।
सत्ता परिवर्तन परखने का अच्छा मौका
हुड्डा ने कहा कि सत्ता परिवर्तन होने पर उन्होंने कहा था कि इससे जनता और खुद उनको फायदा होगा। जनता को नई सरकार को तोलने का मौका मिल जाएगा और मुझे अपने और पराये की पहचान हो जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सम्मान पेंशन को अपमान पेंशन बना दिया है। बुजुर्गों को पेंशन के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। बीमार पेंशन धारक के बैंक आने में असमर्थ होने के बावजूद उन्हें चारपाई पर बैंक आने के लिए मजबूर किया जाता है। यमुनानगर जिले में तो पेंशन धारकों को चार महीने से पेंशन नहीं मिली है।
सोचा था हौसला अफजाई करूंगा
उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद सोचा था कि छह महीने तक सरकार का कामकाज देखूंगा और अच्छा काम किया तो हौसला अफजाई भी करूंगा लेकिन इस सरकार से समाज का हर वर्ग त्रस्त हो चुका है। इसलिए छह महीने से पहले सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना पड़ा।
कम पढ़े लिखे सांसदों और विधायकों के इस्तीफे ले सरकार
पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता निर्धारित किए जाने पर उन्होंने कहा कि केेंद्र और प्रदेश सरकार पहले आठवीं से कम पढ़े-लिखे सांसदों और विधायकों के इस्तीफे लें, इसके बाद पंचायती संस्थाओं के चुनाव में यह व्यवस्था लागू करे। केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि इसके राज में कहीं जवान तो कहीं किसान धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं प्रदेश में अतिथि अध्यापकों और कंप्यूटर आपरेटरों को बेरोजगार किया जा रहा है।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर कुलदीप शर्मा, रण सिंह मान, हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा, डा. राम प्रकाश, फूलचंद मुलाना, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी, प्रो. वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक सुभाष चौधरी, कृष्णा पंडित व अर्जुन सिंह, गुरदयाल पुरी, भूपाल भाटी, सतपाल कौशिक, योगेश मेहंदीरत्ता, निर्मल सिंह, राजकुमार त्यागी, डॉ. गेंदाराम, सुमन, एडवोकेट कुलवंत सिंह, आस मोहम्मद, समेत कार्यकर्ता और लोग मौजूद रहे।
हुड्डा ने किसानों से पूछे 12 सवाल
क्या मेरे 10 साल के कार्यकाल में गन्ने की कीमत का भुगतान साथ-साथ नहीं होता था? क्या कभी मिलों ने यूं पेमेंट रोकी थी, जो इस साल रोक रखी है?
क्या चौटाला सरकार के दौरान मिलों में डाले गए गन्ने की कीमत का भुगतान मैंने सत्ता में आकर नहीं करवाया था?
क्या मेरी सरकार के दौरान हरियाणा में गन्ने की कीमत देश में सबसे अधिक नहीं थी?
क्या मेरी सरकार के दौरान हरियाणा में गन्ने की कीमत देश में सबसे ज्यादा नहीं थी?
क्या भाजपा सरकार ने गन्ने की कीमत में एक नए पैसे की भी बढ़ोतरी की है?
क्या मेरे समय में पॉपुलर 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक नहीं बिका था, जो अब गिरकर 400 रुपये प्रति क्विंटल नहीं हो गया है?
क्या मेरी सरकार के दौरान कभी मंडियों में धान की यूं पिटाई हुई थी, जो इस साल हुई?
क्या मेरे शासन काल में दस वर्षों तक सभी फसलों का अच्छा भाव नहीं मिलता था?
क्या मेरी सरकार मेें कभी खाद पुलिस थानों में बंटी थीं? या कभी खाद की मांग करते हुए किसानों पर लाठियां बरसी थीं?
क्या कभी खाद लेने के लिए महिलाएं पुलिस थानों में गई थीं?
क्या मेरे शासनकाल में किसानों को पूरी बिजली नहीं मिलती थी?
क्या मेरी सरकार बनने से पहल किसानों से फसली ऋण पर 11 प्रतिशत ब्याज नहीं लिया जाता था?
क्या मैंने सहकारी बैंकों के कर्ज वसूली के लिए किसानों की गिरफ्तारी तथा उनकी जमीन को नीलाम करने के काले कानून को खत्म नहीं किया था?