प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल का विस्तार कर तीन नए मंत्री और चार संसदीय सचिव शामिल किए हैं। रादौर से विधायक श्याम सिंह राणा को भी मुख्य संसदीय सचिव की शपथ दिलाई गई। हरियाणा का गठन हुए 49 साल बीत चुके हैं, इन सालों में रादौर की राजनीतिक दृष्टि से उपेक्षा हुई लेकिन वीरवार को जैसे ही राणा ने संसदीय सचिव पद की शपथ ग्रहण की तो रादौर वासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
साथ ही पूरा यमुना खुशी से झूम उठा। रादौर वासियों और कार्यकर्ताओं ने विधायक निवास पर पहुंचकर जश्न मनाया। हरियाणा बनने के बाद पहली बार रादौर के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि अब विकास की दृष्टि से पिछड़े रादौर के अच्छे दिन आने वाले हैं।
भाजपा नेता अर्जुन पंडित, मलखान सिंह, जय सिंह ढांडा, धर्मबीर दारसी, सुरेंद्र चीमा, वीरेंद्र चानना, राजकुमार घिलौर, रूपेंद्र मल्ली, ईष्ट वर्मा, शुभम, राजकुमार घिलौर, डॉ. बिमल गर्ग, सुमित सिंगला, कृष्ण चंद बापौली, प्रवीण आहुजा, मनजीत पंजेटा, विशाल, अजय छारी, सुलेख चंद, सुनील कुमार और जसविंदर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने विधायक श्याम सिंह राणा को मुख्य संसदीय सचिव बनाकर रादौर क्षेत्र के लोगों का मान-सम्मान बढ़ाया है। अब रादौर विधानसभा क्षेत्र का संपूर्ण विकास होगा।
पहली बार इतनी बड़ी जिम्मेदारी
रादौर विधानसभा क्षेत्र से श्याम सिंह राणा मुख्य संसदीय सचिव बनने वाले पहले विधायक हैं। इससे पहले आज तक हरियाणा बनने के 49 वर्षों के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल ने सत्ता में आने के बाद रादौर विधानसभा क्षेत्र के किसी विधायक को इतना बड़ा पद नहीं दिया। आमतौर पर इससे पहले पूर्व विधायक लहरी सिंह व पूर्व विधायक बंताराम वाल्मीकि क्रमश: भूमि सुधार निगम व शुगर फेडरेशन के चेयरमैन ही बन पाए हैं। वर्ष 1987 में देवी लाल सरकार में रादौर के विधायक रतनलाल कटारिया हैफेड के चेयरमैन रहे।
श्याम सिंह राणा का राजनीतिक रिकार्ड
विधायक श्याम सिंह राणा राजनीति के पुराने खिलाड़ी रहे हैं। राणा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के वफादार सिपाही रहे। जनता पार्टी में उनके पार्टी के प्रति निष्ठा को देखते हुए उन्हें वर्ष 1980 में पिहोवा हलके से पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 1991 व 1998 में उन्होंने कुरुक्षेत्र लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार वे सफल नहीं हो पाए। बाद में राणा समाजवादी जनता पार्टी छोड़ वर्ष 2009 में भाजपा में शामिल हो गए। इसी वर्ष उन्होंने रादौर विधानसभा से चुनाव लड़ा लेकिन इस बार भी उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा। बावजूद इसके राणा ने हिम्मत नहीं हारी और रादौर में पांच साल तक लोगों से संपर्क बनाए रखा। वर्ष 2014 में उनकी मेहनत रंग लाई और इनेलो के गढ़ रादौर विधानसभा में श्याम सिंह राणा ने भाजपा के टिकट पर रिकार्ड तोड़ 38 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की।
केवल भाजपा ने समझा जिले का दर्द
रादौर से भाजपा विधायक श्याम सिंह राणा को प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बनाए जाने पर जिले के राजनीति इतिहास में नया रिकार्ड बन गया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सरकार के कार्यकाल में जिले के दो विधायक महत्वपूर्ण पदों पर हैं। श्याम सिंह राणा से पहले जगाधरी के विधायक चौ. कंवरपाल विधानसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन हैं।
इतिहास गवाह है कि जब-जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, तब-तब जिले के विधायकों की मंत्रिमंडल में ताजपोशी की गई। देश में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में जनसंघ से जुड़ीं डॉ. कमला वर्मा यमुनानगर सीट से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतीं और उन्हें प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का ओहदा दिया गया। वर्ष 1987 में लोकदल और भाजपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। इस बार भी यमुनानगर सीट से डॉ. कमला वर्मा भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतीं और उन्हें दूसरी बार प्रदेश मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री का पद दिया गया।
इसके बाद वर्ष 1995 में वह तीसरी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बनीं और उन्हें फिर मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। पूर्व में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में यमुनानगर से जीत हासिल करने वाले कई विधायक मंत्रिमंडल में मंत्री बन चुके हैं। इनमें डॉ. ओम प्रकाश को वन मंत्री, राजेश शर्मा को खेल मंत्री, सुभाष चौधरी को पर्यावरण मंत्री और अकरम खान को गृह मंत्री बनाया जा चुका है। वहीं पिछली कांग्रेस सरकार में अकरम खान विधानसभा के डिप्टी स्पीकर बनाए जा चुके हैं।