किसान आंदोलन के कारण दिल्ली की सभी सीमाएं सील हैं। इस दौरान दिल्ली जाने वाले ट्रक, ट्राले, सहित अन्य माल वाहक वाहन बीच में फंस गए हैं। इसका असर जिले के प्लाईवुड उद्योग पर भी पड़ रहा है। दिल्ली के रास्ते बंद होने से कई प्रदेशों के ऑर्डर पर तैयार किए माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। करीब चार दिन से करोड़ों का माल या तो गोदामों व ट्रांसपोर्ट या फिर रास्ते में फंसी गाड़ियों में पड़ा है।
प्लाईवुड उद्यमी सतीश, रोशन ने बताया कि दिल्ली सहित जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, कोटा, राजसमंद, बाड़मेर, भरतपुर, अलवर, अजमेर, अहमदाबाद, सूरत, बडोदरा, अमरेली, भावनगर, जामनगर, राजकोट, मुंबई, नागपुर, नासिक, पुणे, पणजी सहित अन्य राज्यों के कई जिलों का माल अभी तक नहीं पहुंच पाया है। इसके अलावा पंजाब, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश सहित हरियाणा के पानीपत, सोनीपत, रोहतक, जींद, भिवानी सहित अन्य जिलों में भी सप्लाई बाधित हो गई है। माल ट्रांसपोर्ट पर बुक होने के बाद भी आपूर्ति नहीं होने और कुछ माल रास्ते में फंसा होने से उद्यमियों व कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में प्लाईवुड का बड़ा कारोबार है। यहां पर करीब 400 से ज्यादा छोटी बड़ी ईकाइयां हैं। यहां तैयार प्लाईवुड की काफी मांग है और गुणवत्ता अच्छी होने के चलते इसकी पूरे देश में आपूर्ति की जाती है। आवाजाही ठप होने से ईकाइयों में तैयार 80 प्रतिशत यही पड़ा है। चार दिन से माल तैयार है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस दौरान जिले के 200 से ज्यादा ट्रकों का माल अधर में लटका हुआ है। चार दिन में प्लाईवुड उद्योग का करीब 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। वहीं सप्लाई न होने के कारण ईकाइयों में उत्पादन भी कम कर दिया गया है।
कई राज्यों का माल अटका
हरियाणाा प्लाईवुड मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी ने बताया कि दिल्ली बंद होने से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाने वाला माल दिल्ली के रास्ते ही जाता है। दिल्ली के रास्ते मध्यप्रदेश, गुजराज, मुंबई, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित माल भेजा जाता है। परंतु अब सीमाएं सील होने के कारण सप्लाई ठप है। तैयार माल फैक्टिरियों, गोदामों व ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। जबकि कुछ माल रास्ते में फंसा पड़ा है। जिसे मजबूर इधर उधर से निकलवाना पड़ रहा है। जिससे उद्यमियों को काफी नुकसान हो रहा है। पहले ट्रक चालकों की हड़ताल के कारण उद्यमियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था, वहीं अब इस आंदोलन से फैक्टरी संचालकों को नुकसान हो रहा है। इससे करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।