यमुनानगर। एथलेटिक्स में खिलाड़ियों के साथ जिले का मान भी बढ़ रहा है। खिलाड़ी स्पर्धाओं में अलग-अलग स्तर पर पदक जीतकर आ रहे हैं। वर्ष 2003 से अब तक के रिकॉर्ड अनुसार एथलेटिक्स से जिले की झोली में दो अंतरराष्ट्रीय, 48 राष्ट्रीय, 273 राज्य स्तरीय पदक आ चुके हैं। जिले का मान बढ़ाने वाले एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए तीन साल से सरकारी कोच नहीं है। यही नहीं, मंजूरी के चार साल में सिंथेटिक ट्रैक भी नहीं बन पाया है।
तेजली खेल परिसर में सिंथेटिक ट्रैक वर्ष-2021 में मंजूर हो गया था। इसके बाद खेल विभाग ने ड्राइंग तैयार कराई। ड्राइंग मुताबिक 400 मीटर का आठ लेन ट्रैक बनना है। इसमें लंबी कूद, हाई जंप, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, हैमर थ्रो व अन्य एथलेटिक्स खेलों के मैदान बनेंगे। इसके निर्माण पर 10.30 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है, पर चार साल में काम नहीं लगा। सिंथेटिक ट्रैक के अभाव में खिलाड़ी उबड़-खाबड़ मैदान पर अभ्यास करने पर मजबूर हैं।
सिंथेटिक ट्रैक की कमी झेल रहे एथलेटिक्स खिलाड़ियों की परेशानी वर्ष 2022 में और बढ़ गई। क्योंकि सरकारी स्तर पर एथलेटिक्स के एक मात्र कोच प्रवीन कुमार का भी तबादला हो गया। इसके बाद से एथलेटिक्स का सरकारी कोच नहीं है। जिले में एथलेटिक्स कोच के तीन पद स्वीकृत है, पर अभी एक भी नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए जिले के निजी कोचिंग या फिर दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। संवाद
छह से बढ़कर आठ हुई एथलेटिक्स की नर्सरियां
एथलेटिक्स में खिलाड़ियों का कितना रुझान है, इसका अंदाजा सरकारी व निजी खेल व शिक्षण संस्थान स्तर पर बढ़ रही एथलेटिक्स खेल नर्सरियों से लगाया जा सकता है। गत वर्ष संस्थानों में छह एथलेटिक्स नर्सरियां थी, वहीं हालही में जिले के लिए खेल विभाग से मंजूर 30 खेल नर्सरियों में आठ एथलेटिक्स की है। इनमें जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन यमुनानगर, राजीव गांधी खेल परिसर छछरौली, राजीव गांधी खेल परिसर कोटरा खास, ग्राम पंचायत बरसान, ग्राम पंचायत तिगरा, ग्राम पंचायत सुघ, ग्राम पंचायत गोलनी, ग्राम पंचायत मुसिम्बल में एथलेटिक्स नर्सरी शुरू हुई है। गत वर्ष से इस बार दो एथलेटिक्स नर्सरियां बढ़ी हैं। यह नर्सरियां ही सरकारी कोच के अभाव में परेशान खिलाड़ियों के काम आई हैं। जहां प्रति नर्सरी 25-25 खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कोच से निशुल्क प्रशिक्षण के साथ विभाग से डाइट खर्च की सुविधा मिल पाई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके दिव्यांका व नूजरत
एथलेटिक्स में दिव्यांका चौधरी व नूजरत अली ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपना व जिले का नाम दर्ज किया। सेक्टर-17 निवासी नूजरत ने वर्ष-2017 में जूनियर एशियन चैंपियनशिप की सौ मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया। इसी तरह सुंदरनगर पार्ट-2 निवासी दिव्यांका वर्ष-2021 में बांग्लादेश के ढाका में हुई साउथ एशियन मैराथन में कांस्य पदक लेकर आई। इसके अलावा भी नूजरत व दिव्यांका राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में पदकों की झड़ी लगा चुके हैं। हालही में कांसापुर निवासी रोहित राष्ट्रीय स्तर पर उड़ीसा में हुई खेलो इंडिया में हाई जंप स्पर्धा में पदक जीता है।
सरकारी कोच न होने पर शुरू कराई नर्सरी
जिला एथलेटिक्स संघ के प्रधान डॉ. प्रवीन कुमार ने बताया कि सरकारी स्तर पर एथलेटिक्स का कोच न होने से परेशान खिलाड़ियों की मदद के लिए संघ ने तेजली में खेल नर्सरी शुरू की है, जिससे उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण व डाइट खर्च मिल सके। वर्ष 2003 से अब तक रिकॉर्ड अनुसार जिले के एथलेटिक्स खिलाड़ी दो अंतरराष्ट्रीय, 48 राष्ट्रीय व 273 राज्य स्तर के पदक विजेता हैं। वर्ष-2007 से एथलेटिक्स में अधिक रुझान होने लगा, वहीं नीरज चोपड़ा के ओलंपिक में पदक जीतने से क्रेज और बढ़ा है। सिंथेटिक ट्रैक की मांग भी एक दशक से की जा रही है। यह ट्रैक बनने से खिलाड़ियों को सीधा लाभ मिलेगा, चूंकि अलग-अलग स्तर की प्रतियोगिताएं सिंथेटिक ट्रैक पर होती हैं।