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Yamuna Nagar News: पितृपक्ष आज से, 10 अक्तूबर को समापन

Sat, 26 Sep 2026 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा के साथ किए पितृ कर्म से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, आयु और वंश वृद्धि की कामना पूर्ण होती है। घर में धन-धान्य, वैभव, समृद्धि और यश की वृद्धि होती है।
मान्यता है कि पितर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और आपदाओं से उनकी रक्षा करते हैं। इस वर्ष 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होगी। 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समापन होगा। वहीं मुख्य पितृपक्ष की प्रतिपदा 27 सितंबर को होगी।
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ज्योतिषाचार्य महेश शांडिल्य ने बताया कि पितृपक्ष पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की महत्वपूर्ण अवधि है। जिन परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात हो, उनका श्राद्ध संबंधित तिथि पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते समय श्रद्धा और विधि का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मशांति की कामना की जाती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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पंडित ललित शर्मा ने बताया कि श्राद्ध केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य, जरूरतमंदों को भोजन और पितरों का स्मरण करना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं में भी श्राद्ध कर्म के महत्व का वर्णन मिलता है। श्रद्धा से किए पितृ कर्म से आयु, सुख, समृद्धि और संतान की उन्नति की कामना की जाती है।
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