संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को मनाया जाएगा। इस बार लोहड़ी पर दोपहर तीन बजकर 18 मिनट तक भद्रा रहेगा। ऐसे में लोहड़ी पूजन और अग्नि प्रज्ज्वलन शाम को करना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन शाम पांच बजकर 44 मिनट पर सूर्यास्त होगा और प्रदोष काल में लोहड़ी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं, अग्नि पूजन के लिए गोधूलि मुहूर्त लोहड़ी का सबसे आदर्श समय होगा।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि लोहड़ी उत्तर भारत का प्रमुख पर्व है। लोक मान्यताओं का यह पर्व लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में कई स्थानों पर बड़े-बड़े कार्यक्रम करवाए जाते हैं। हंसी, मजाक व खुशी के इस पर्व में लोगों की गहरी आस्था है। पर्व के दिन लोग अग्नि पूजन करते हैं। मान्यता है कि अग्नि में तिल अर्पित करने से जीवन के कष्ट भस्म होते हैं। इस दिन दान करना भी शुभ होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि अग्नि प्रज्ज्वलित व पूजन शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत शुभ होगा। उन्होंने बताया कि यह हमारी कृषि सांस्कृतिक संपदा व धरोहर का पर्व है। लोक आस्था का यह पर्व पवित्रता व सादगी से मनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि लोहड़ी के दिन दोपहर तीन बजकर 18 मिनट तक भद्रा काल रहेगा।
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि शाम पांच बजकर 44 मिनट पर सूर्यास्त होगा। इसके बाद दो घंटे अग्नि पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा। पंरतु शाम पांच बजकर 42 मिनट से शाम छह बजकर 09 निमट तक गोधूलि मुहूर्त होगा, यह पूजन के लिए अत्यंत शुभ होगा। वहीं, इस दौरान शाम पांच बजकर 44 मिनट से सात बजकर 44 मिनट तक शुभ मुहूर्त होगा। इस मुहूर्त में अग्नि प्रज्ज्वलित कर उसकी पूजा करना अत्यंत शुभ होगा।
पूजन के दौरान तिल, गुड, मूंगफली, मक्का, गेहूं की बालियां, तिल की रेवड़ी, तिल लड्डू, गजक इत्यादि अर्पित करना चाहिए। अग्नि प्रज्ज्वलित करने के बाद अग्नि देव के सम्मुख विभिन्न सामग्री रखें और फिर मनोकामना व मंत्र पूजन के साथ सामग्री अर्पित करें। उन्होंने बताया कि इस दिन पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।