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सरस मेले में पौराणिक व पारंपरिक वस्तुओं व शिल्प से रूबरू होंगे लोग: डीसी

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सरस मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से शिल्पकार और हस्तशिल्पी भाग लेंगे। मेले में जम्मू की शॉल, जैकेट सहित अन्य ऊनी कपड़ें, असम के बांस उत्पाद, गोरखपुर की टेराकोटा की मूर्तियां सहित नवाबी शहर लखनऊ की हस्तशिप आकर्षण का केंद्र होगी। मेले में विभिन्न शिल्पों की 250 से ज्यादा स्टाल लगाई जाएंगी। यह जानकारी एडीसी भारत भूषण कौशिक ने दी। 12 दिवसीय मेले का शुभारंभ रविवार दोपहर ढाई बजे शिक्षा और पर्यटन मंत्री कंवरपाल करेंगे। डीसी मुकुल कुमार ने बताया कि शुभारंभ पर विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। डीसी ने कहा कि इस मेले में लोगों को देश की विभिन्न सांस्कृतिक, पौराणिक शिल्प को जानने और समझने का मौका मिलेगा। इससे लोग हमारे देश की पौराणिक धरोहरों से रूबरू होंगे। वहीं, लोगों को यह वस्तुएं एक ही स्थान पर खरीदने का मौका मिलेगा। डीसी ने कहा कि यह मेला 20 फरवरी तक चलेगा। प्रतिदिन प्रतिदिन शाम पांच बजे सांस्कृतिक संध्या करवाई जाएगी। जिसमें स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी व प्रदेश के विख्यात कलाकार दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। यह मेला एडीसी भारत भूषण कौशिक की देखरेख में किया जा रहा है। एसडीएम बिलासपुर नवीन आहूजा को मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है। एडीसी ने बीबी कौशिक ने बताया कि इस मेले में ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार से देश के सभी प्रमुख राज्यों के कलाकारों व शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया है। मेले में पारंपरिक और हस्तशिल्प के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। इसके अलावा जम्मू की शॉल, जैकेट, असम राज्य के बांस से बने घरेलू साज-सज्जा व दैनिक उपयोग के अन्य उत्पाद, गोरखपुर उत्तरप्रदेश की टेराकोटा की मूर्तियां, लखनऊ उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तशिल्प के उत्पाद आर्कषण होंगे। विभिन्न स्वयं सहायता समूह द्वारा अपनी पारंपरिक कला के आधार पर तैयार किए गए उत्पाद भी यहां देखने को मिलेंगे।
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