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Yamuna Nagar News: कुत्तों की नसबंदी अभियान की सुस्ती से परेशान हो रहे लोग

Tue, 08 Sep 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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नगर निगम के डॉग शेल्टर में खाली पड़े पिंजरे। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। शहर में बेसहारा कुत्तों की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। नगर निगम द्वारा शुरू किया गया नसबंदी और टीकाकरण अभियान बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे लोगों का सड़कों पर निकलना दूभर हो गया है।
हालात यह हैं कि जनवरी से अब तक महज करीब 3,600 कुत्तों की ही नसबंदी हो पाई है। नवंबर 2025 में टेंडर हासिल करने वाली एजेंसी को इस साल दिसंबर तक 6,500 नसबंदी का लक्ष्य दिया गया था। प्रति कुत्ता 1,500 रुपये का भारी भुगतान करने के बावजूद एजेंसी की ढीली कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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शहर में अनुमानित 40 हजार से अधिक बेसहारा कुत्ते हैं। निगम ने 21,500 अतिरिक्त कुत्तों की नसबंदी के लिए अब तक पांच बार निविदाएं जारी कीं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। दरअसल, राज्य सरकार द्वारा भुगतान दर 1,500 रुपये से घटाकर 800 रुपये प्रति कुत्ता किए जाने के बाद से किसी भी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। गली-मोहल्लों और मुख्य सड़कों से लेकर सरकारी दफ्तरों के मुहाने तक आवारा कुत्तों के झुंड जमे रहते हैं। नागरिक अस्पताल में रोजाना 8 से 10 डॉग बाइट के मामले पहुंच रहे हैं, जबकि निजी अस्पतालों का आंकड़ा इससे कहीं अधिक है।
बीते डेढ़ साल में 17,582 लोग कुत्तों के हमले का शिकार बन चुके हैं। औसतन हर महीने 977 और प्रतिदिन 33 लोग जख्मी हो रहे हैं।
शहरवासी अमनदीप, विनोद, अंकुर, सुमित व राकेश का कहना है कि कुत्तों की संख्या घटेगी तो क्या बढ़ती ही जा रही है। नगर निगम कार्यालय में भी कुत्तों ने डेरा बना लिया है। कुत्ते कहीं सीढि़यों पर सो रहे हैं तो कहीं लोगों के बैठने के लिए रखी गई कुर्सियों के नीचे आराम करते दिख रहे हैं। अब तो सड़क से निकलते हुए भी डर लगता है कि कहीं कुत्तों का झुंड उन पर हमला न कर दे।
डॉग शेल्टर खाली पिंजरे और शराब की बोतलें
कुत्तों को पकड़ कर अंबाला रोड स्थित जिला परिषद कार्यालय के सामने बने डॉग शेल्टर में रखा जाना होता है, ताकि नसबंदी के बाद एक सप्ताह तक उनकी देखभाल हो सके। लेकिन जमीनी पड़ताल में इस शेल्टर हाउस की पोल खुल गई। पूरा परिसर वीरान पड़ा है, सारे पिंजरे खाली हैं और चारों तरफ गंदगी का अंबार है। यहां आवारा कुत्तों के लिए पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है, जबकि कमरों में शराब की खाली बोतलें बिखरी पड़ी हैं। इलाज का केंद्र बनने की बजाय यह शेल्टर असामाजिक तत्वों और शराबियों का अड्डा बन चुका है।
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बेसहारा कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण कराया जा रहा है। 21,500 कुत्तों की नसबंदी के लिए निविदा लगा रखी है। उम्मीद है कि एजेंसियां टीकाकरण व नसबंदी के लिए आवेदन जरूर करेंगी। -विनोद बैनीवाल, सीएसआई, नगर निगम।

नगर निगम के डॉग शेल्टर में खाली पड़े पिंजरे। संवाद

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