संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। जठलाना गांव में करीब 150 साल पुराने पीपल के पेड़ को लेकर लोग आमने-सामने आ गए। कुछ लोग पेड़ को काटना चाहते हैं तो कुछ लोग पेड़ को कटने से रोकना चाहते हैं।
जठलाना निवासी अशोक भटनागर, राजकुमार, सुरेंद्र कुमार, मोहन कश्यप, श्याम मेहता, ओमप्रकाश कश्यप, डाॅ. राजन, शक्ति कश्यप ने बताया कि पीपल का पेड़ पर्यावरण स्वच्छ बनाए रखने के साथ हमारी आस्था का भी केंद्र है। हमारे पूर्वज व हम वर्षों से इसकी पूजा करते आ रहे हैं। इसके साथ हमारी आस्था जुड़ी है। पीपल का पेड़ पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
कुछ लोग पीपल के पेड़ को काटना चाहते हैं। एक पेड़ को तैयार होने में छह से सात साल लग जाते हैं। यह पीपल का पेड़ छाया भी देता है, जिसके नीचे मोहल्ले के बच्चे खेलते हैं और पशु भी पेड़ की छाया में बैठते हैं। इसलिए वह लोग किसी सूरत में पेड़ को कटने नहीं देंगे।