मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में भर्ती मरीज की जान से खिलवाड़ करने में स्टाफ ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पहले तो मरीज के लिए डोनेट किए गए चार लोगों के प्लेटलेट्स दूसरे मरीज को चढ़ा दिए। इसे लेकर मरीज के परिजनों ने रात को ब्लड बैंक में हंगामा किया और डायल 112 पुलिस को मौके पर बुला लिया। बाद में प्लेटलेट्स देने के लिए जब रक्त की क्रॉस जांच की गई तो पता चला कि मरीज का ब्लड ग्रुप बी-निगिटिव है। जबकि लैब से मरीज को बी-पॉजिटिव प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए कहा गया था। यदि मरीज को दूसरे ग्रुप के प्लेटलेट्स चढ़ जाते तो उसकी तबीयत खराब हो सकती थी।
गोलनी गांव के दिलशाद ने बताया कि उसके मासड़ बीबीपुर निवासी फरियाद अली को कुछ दिन से बुखार था। जिस पर उन्हें मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में कुछ सुधार होने पर शनिवार को उनकी छुट्टी हो गई। परंतु प्लेटलेट्स घटने पर फरियाद अली को 16 सितंबर को दोबारा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके प्लेटलेट्स केवल 27 हजार रह गए थे। इसलिए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उन्हें चार यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने की बात कही।
अस्पताल की लैब से फरियाद अली के ब्लड की जांच कर बी-पॉजिटिव ग्रुप के प्लेटलेट्स ट्रामा सेंटर स्थित ब्लड बैंक से लेकर आने को कहा। उन्होंने अपने चार रिश्तेदारों से प्लेटलेट्स डोनेट कराए। रात आठ बजे के बाद वह प्लेटलेट्स लेने गए तो ब्लड बैंक के स्टाफ ने उन्हें बताया कि उनके पास प्लेटलेट्स नहीं है। उनके जो प्लेटलेट्स थे वह इमरजेंसी में किसी दूसरे मरीज को चढ़ा दिए हैं। इस पर परिजनों ने एतराज जताते हुए डायल 112 पुलिस को मौके पर बुला लिया। दिलशाद ने बताया कि रात को उन्होंने ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. निशा को फोन किया तो वह कहने लगी कि उनके पास केवल एक ही यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध है। बाकी प्लेटलेट्स का इंतजाम वह निजी बैंक से करवा देंगी।
ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स देने से पहले फरियाद अली के रक्त की जांच की तो उन्हें बताया गया कि उसका ब्लड ग्रुप तो बी-निगिटिव है। यह सुनकर वह हैरान रह गए, क्योंकि अभी तक फरियाद अली का अस्पताल में जो उपचार चल रहा था वह बी- पॉजिटिव ग्रुप के आधार पर हो रहा था। अपना शक दूर करने के लिए मंगलवार सुबह उन्होंने बाजार में निजी लैब से फरियाद के ब्लड ग्रुप की जांच कराई तो वहां से भी बी-पॉजिटिव की रिपोर्ट दी गई। अस्पताल व निजी लैब की रिपोर्ट लेकर लैब इंचार्ज के पास गए तो वहां उनकी एक नहीं सुनी गई और किट में खराबी होने की बात कहने लगे। दिलशाद का आरोप है यदि गलत ग्रुप के प्लेटलेट्स चढ़ जाते तो फरियाद अली की जान भी जा सकती थी। यह बड़ी लापरवाही है। मंगलवार दोपहर को फरियाद अली का उपचार शुरू हुआ। जिससे उनके प्लेटलेट्स 38 हजार तक पहुंच गए थे।
सरकारी ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. निशा ने बताया कि क्रॉस चेकिंग में मरीज का ब्लड ग्रुप बी-निगिटिव मिला था। इसलिए उन्हें बी-पॉजिटिव प्लेटलेट्स नहीं दिए गए। बैंक में बी-निगिविट की एक ही यूनिट मौजूद थी जो उन्हें देने की बात कही थी।
अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने गलत रिपोर्ट देने की शिकायत परिजनों ने वापस ले ली थी। फिर भी वह अपने स्तर पर इस मामले की जांच कराएंगी ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने न आए।