अपने शहीद बेटे रॉकी की फोटो के साथ पिता प्रीतपाल और मां अंग्रेजो देवी। परिवार
- फोटो : अपने शहीद बेटे रॉकी की फोटो के साथ पिता प्रीतपाल और मां अंग्रेजो देवी। परिवार
यमुनानगर। 5 अगस्त 2015 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में आतंकी हमले में बलिदान हुए गांव रामगढ़ माजरी के बीएसएफ के जांबाज कॉन्स्टबेल रॉकी पर आज भी गांव के लोगों को नाज है। पिता प्रीतपाल का कहना है कि बेटे के चले जाने का दुख तो है, लेकिन देश के लिए उसका बेटे का बलिदान हुआ, इस बात का गर्व अधिक है। मां अंग्रेजो देवी बोलीं, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमला बहुत ही दर्दनाक था, जिसमें 26 लोग मारे जाने की खबर सामने आई थी। लेकिन, पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को सेना ने हवाई हमलों से खत्म कर दिया। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। सरकार को इसी तरह आतंकवाद को खत्म करना होगा। जो पूरे विश्व के लिए चुनौती बना हुआ है।
ऐसे मिली थी सूचना
उस समय रॉकी के शहीद होने सूचना सबसे पहले उसके बड़े भाई रोहित को ऊधमपुर से फोन पर सीओ ने दी थी। सीओ ने रोहित को बताया था कि जम्मू से बीएसएफ की बस ऊधमपुर आ रही थी। इसी बीच दो आतंकियों ने गाड़ी रुकवाई और बस पर ही विस्फोट की कोशिश की, लेकिन रॉकी ने मौका न देते हुए पहले एक आतंकवादी को मार गिराया, लेकिन दूसरे आतंकी के हमले में वह बलिदान हो गए। घायल होते हुए भी इस जांबाज ने आतंकी का मुकाबला किया। इसी का नतीजा था कि दूसरे आतंकी को लोगों ने पकड़ लिया। आज भी हर किसी की जुबां पर राॅकी की बहादुरी के चर्चे हैं। रॉकी नवंबर 2012 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे।