यमुनानगर। नए शिक्षा सत्र का आरंभ होते ही निजी स्कूलों की मनमानी का खेल शुरू हो गया है। जिले के तमाम निजी स्कूल नियमों को ताक पर रखकर निजी प्रकाशकों की किताबें लगवा रहे हैं। यह सब सरेआम हो रहा है और अधिकारी चुपचाप इसे देख रहे हैं। कार्रवाई न होने के कारण निजी स्कूल प्रबंधक यह सब कुछ धड़ल्ले से कर रहे हैं। वहीं अभिभावक स्कूलों की मनमानी को न चाहते हुए भी मानने को मजबूर हैं।
कमीशन के इस खेल में प्रकाशक, स्कूल संचालक, विक्रेता चांदी कूट रहे हैं। निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें जो हर साल बदली जाती हैं, इस बार भी धड़ल्ले से बदलकर अभिभावकों से खरीदवाई जा रही हैं। इस बार बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तकें पर्याप्त संख्या में हैं। वहीं हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से संबंधी निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी बाजार के भरोसे छोड़ दिया है।
नियमानुसार निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही लगवाई जा सकती हैं। परंतु निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं। इस दौरान एक बच्चे के पिता दीपक ने बताया कि स्कूलों की ओर से अभिभावकों को कहा जाता है कि यदि सरकार व विभाग की बात सुनेंगे तो बच्चे अन्यों से पिछड़ जाएंगे। स्पर्धा की दौड़ में बच्चे पीछे न रह जाए, इसके अनुसार ही उन्हें तैयार करने के लिए यह किताबें लगवाई जा रही हैं।
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मोटी कमीशन का खेल
एक पुस्तक विक्रेता ने बताया कि इस बार कमीशन पहले से अधिक है। पहले जो कमीशन 25 प्रतिशत था वह बढ़ा कर 35 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बार भी पुस्तकों में बदलाव किया गया है। बाजार में छोटी कक्षाओं की पुस्तकों का सेट 800 रुपये से कम नहीं है। विक्रेता ने बताया कि पहली कक्षा की एक पुस्तक 30 पेज की है, जिसकी कीमत 250 रुपये है। जबकि दूसरी कक्षा की पुस्तक 300 रुपये तक भी है। कमीशन के इस खेल में अभिभावक पिस रहे हैं।
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हर साल बदलती हैं किताबें
स्कूल संचालक हर साल पुस्तकें बदलवा देते हैं ताकि अभिभावकों को नई पुस्तकें ही खरीदनी पड़े। अन्यथा अभिभावक पुरानी किताबें लेकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इस साल भी पुस्तकें बदल दी गई हैं। वहीं पिछले साल की अपेक्षा इस बार किताबों के दाम में 50 फीसदी अधिक हैं। मजबूर अभिभावकों को यह खरीदनी पड़ रही हैं।
अधिकारी नहीं करते कार्रवाई
नियमों के विरुद्ध पुस्तकें लगवाने पर जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से कार्रवाई की जाती है, परंतु मौजूदा समय में अधिकारी पूरी तरह आंख मूंदे बैठे हैं। कमीशन का यह खेल अधिकारियों के सामने हो रहा है, परंतु इस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारी शिकायत न होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि अभिभावक लचर व्यवस्था के कारण शिकायत करने से डरते हैं। ऐसे में अधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन जिले में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
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अभी इस संबंध में उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। यदि कोई शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी। ऐसा न हो इसके लिए टीम बनाकर विजिट की जाएगी, यदि ऐसा होता पाया गया, तो नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-रामदिया गागट, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।