यमुनानगर की रादौर अनाजमंडी रादौर में धान का उठान न होने से लगा जाम।
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धान की रादौर, जठलाना व गुमथला की अनाजमंडियों में सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद उठान न होने से मंडियों में जाम लग गया है। अनाजमंडी रादौर में जाम लगने के कारण किसानों को फड़ पर धान की फसल डालने के लिए कही जगह नहीं मिल पा रही है। मंडी में जाम के कारण मंडी के बाहर भी सड़क पर धान के ढेर लग गए हैं। यहां तक की शहर की अनाजमंडी में चल रहीं सब्जी मंडी की जगह में भी धान की फसल डाल दी गई है। अब अनाजमंडी में सब्जी मंडी लगाने के लिए कोई जगह नहीं बची है। मंडी में चारों तरफ धान की ढेरियां व आढ़तियों की दुकानों के आगे धान के कट्टों के चट्टे लग गए हैं। अनाजमंडी में आढ़तियों की दुकानों के आगे बने बरामदे में भी धान के कट्टों के ढेर लगे हुए है।
मंडी के प्रधान संजय गुप्ता ने बताया कि मंडी में सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद धान का उठान न होने से स्थिति भयंकर बनी हुई है। जब तक मंडी में धान के उठान की व्यवस्था ठीक नहीं होती, तब तक इसी प्रकार जाम की समस्या से आढ़तियों व किसानों को समस्या से जूझना पड़ेगा। उधर, भारतीय किसान यूनियन जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि सरकार की ओर से धान की खरीद तो शुरू कर दी गई है, लेकिन उठान को लेकर सरकार व अधिकारी गंभीर नहीं है। जिसका खामियाजा किसान भुगत रहें है। यदि इसी प्रकार मंडियों में जाम लगा रहा तो किसान कैसे अपनी धान की फसल बेच पाएंगे मार्केट कमेटी के सचिव जय सिंह बरहेडी ने बताया कि इस समय मंडी में लगभग 30 हजार क्विंटल धान पड़ी हुई है। जिसको उठवाने के लिए तेजी से काम चल रहा है। उधर शनिवार को वेयर हाउस की ओर से रादौर, जठलाना व गुमथला अनाजमंडियों में धान की सरकारी खरीद की गई। अब तक रादौर मंडी में 27225 क्विंटल, गुमथला में 2565 क्विंटल व जठलाना में 1990 क्विंटल से अधिक धान की खरीद की गई। शनिवार को वेयरहाउस की ओर से रादौर मंडी में 11 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीद की गई है। हैफेड के मैनेजर पवन कांबोज ने बताया कि मंडी में उठान की व्यवस्था की जा रहीं है। उठान शुरू हो गया है। हैफेड द्वारा अब तक खरीदा गया लगभग 30 हजार क्विंटल धान का उठान का काम चल रहा है। जल्द ही फड पर पडा धान उठवा लिया जायेगा। इस बार हैफेड की ओर से खुद धान की खरीद करके उसे स्टोर किया जायेगा। मिलर्स के आने के तक हैफेड की ओर से स्टोरेज की व्यवस्था की जायेगी। 17 प्रतिशत नमी तक ही धान की खरीद की गई है।