मंडियों में धान की आवक तेज हो गई है, लेकिन उठान की सुस्त रफ्तार के कारण आढ़ती और किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि धान की बोरियों से मंडियां अट गईं हैं। हालात यह हो गए हैं कि किसानों को फसल गिराने की जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में किसानों को सड़क पर फसल डालनी पड़ रही है, जिससे किसानों के साथ काम करने वाले श्रमिकों को भी परेशानी हो रही है। आढ़तियों का कहना है कि पहले सभी मिलर अपने अनुसार उठान करते रहते थे, परंतु इस बार मिलरों को अर्बन और रूलर दो गुटों में बांट दिया गया है। निर्देशानुसार पहले एक गुट और उसके बाद दूसरा गुट उठान करेगा, जिस कारण स्थिति विकट बन गई है।
यमुनानगर अनाज मंडी एसोसिएशन के जगाधरी मंडी प्रधान मनीष कांबोज ने बताया कि जिले में 25 राइस मिलर हैं, जिसमें 10 जगाधरी क्षेत्र के और शेष जिले के अन्य क्षेत्रों के हैं। खरीद शुरू होने तक इनका सरकार से एग्रीमेंट नहीं हो पाया था। खरीद के दो दिन बाद एग्रीमेंट हुआ। वहीं अब इसमें यह पेंच है कि पहले अपने क्षेत्र के मिलर और इसके बाद दूसरे क्षेत्र के मिलर उठान करेंगे। मनीष ने बताया कि इससे व्यवस्था बिगड़ गई है। चूंकि आधे मिलर उठान करेंगे तो वे अपनी सीमा के अनुसार ही कर पाएंगे। ऐसे में आधा माल यूं ही रह जाएगा। यदि किसी के पास लेबर और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था बिगड़ जाती है, तो समस्या ज्यादा बढ़ जाएगी। सभी मिलर एक साथ उठान करते हैं, तो व्यवस्था बनी रहेगी।
यदि धान आवक की बात करें तो शहर की जगाधरी अनाजमंडी में चारों तरफ बोरियां ही नजर आ रही हैं। इसके बाद आने वाले किसानों को फसल रखने की जगह नहीं मिल रही है। किसान सूखने के लिए धान सड़क पर फैला रहे हैं। इससे किसानों के साथ आढ़ती व श्रमिक भी परेशान हो गए हैं। वहीं आने वाले वाहन चालकों को भी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
बारिश की संभावना से सहमे किसान
मंडी में धान की बोरियां रखने की जगह नहीं बची है। दूसरी ओर मौसम ने तीन दिन बारिश की संभावना जताई है। इससे किसान सहमे हुए हैं। हालांकि अधिकारी मंडी में बारिश से धान बचाव के सभी प्रबंध होने के दावे कर रहे हैं, परंतु यह एक सीमित क्षेत्र के लिए हैं। यदि मंडी में चारों तरफ धान की बोरियां पड़ी रहेंगी तो इसका प्रबंध मुश्किल है। ऐसे में इसका आढ़तियों और मिलरों को भारी नुकसान होगा।
जिले में हमारे क्षेत्र के दस और दूसरे क्षेत्र के 15 मिलर हैं। नियमानुसार पहले अपने मिलर का कोटा पूरा किया जाता है। 10 मिलर उठान कर रहे हैं, लेकिन आवक ज्यादा है। इसके लिए एजेंसियों को पत्र लिखकर बाहर के मिलर्स को भी उठान की अनुमति देने को कहा गया है। इसके बाद नियमित उठान होगा और परेशानी नहीं होगी।
-ऋषिराज, सचिव मार्केट कमेटी जगाधरी।