संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 17वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति ने कहा कि हमारा जीवन एक डायरी के समान है, जिसके प्रथम पेज पर जन्म और अंतिम पेज पर मृत्यु है। बीच वाले पन्ने खाली हैं, उन पर स्वयं लिखना है। बीच के पन्ने हमारा जीवन हैं।
उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु सभी की एक जैसी होती है, पर जीवन सभी का अलग-अलग होता है। कोई जीवन को दुखी होकर व्यतीत करता है तो कोई सुखी होकर बिताता है। कोई स्वार्थ व घमंड में जीता है तो कोई दीन-दुखियों की मदद को ही जीवन का उद्देश्य बना लेता है। कोई पापों में जीवन को व्यर्थ गंवा देता है तो कोई धर्म-ध्यान व पुण्य के कार्यों से जीवन को सार्थक करता है। जीवन जीना भी एक कला है, जिसे हर कोई व्यक्ति पहचान नहीं पता। जो इस संसार में जन्म लेकर अच्छे कार्य, परोपकार, दान-पुण्य करते हैं और गुरुओं की शरण में रहते हैं। साथ ही लगातार स्वाध्याय में लीन रहते हैं, उनका जन्म व जीवन दोनों सार्थक होते हैं।
उनके अनुसार भगवान महावीर स्वामी ने कहा है कि संसार में जन्म लेना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि जन्म लेकर जीवन को सार्थक बनाना ही सबकुछ है। जीवन तभी सार्थक होगा, जब इस जीवन को सद्कार्यों में लगाया जाएगा, क्योंकि यदि आप मानव हो तो आपके हृदय में करुणा, प्रेम, दया, ममता होनी चाहिए, न कि घमंड, काम, क्रोध, वासना। जिस व्यक्ति ने यह सिद्धांत अपना लिया, उसका यह लोक और परलोक दोनों सुधर गए।