संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शहर से सटे गांव शादीपुर के राजकीय प्राथमिक पाठशाला एक ही शिक्षक के भरोसे है। वहीं बच्चों की संख्या 440 से भी ज्यादा है। अभिभावकों के प्रदर्शन के बाद भी शिक्षा विभाग अध्यापकों की तैनाती नहीं कर सका है।
दो वर्ष पहले यहां पर बच्चों के साथ शिक्षकों संख्या भी ठीक थी। 2024 में तबादला प्रक्रिया के बाद यहां से 13 शिक्षक चले गए। इसके बाद यहां पर सिर्फ एक ही शिक्षक है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार इस स्कूल में कम से कम 15 शिक्षक होने चाहिए। परंतु यहां पर एक ही शिक्षक है।
अध्यापक भूषण जगदीश दो वर्ष से पांच कक्षाओं को पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा कक्षा के मेधावी विद्यार्थी अन्य विद्यार्थियों को सबक याद करवाते हैं। इसके बारे में कई बार जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के साथ निदेशालय को सूचित किया जा चुका है। बावजूद इसके यहां पर शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई। बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं और समय खाली बैठे रहते हैं।
शिक्षक भूषण जगदीश हर कक्षा के बच्चों को उनका कार्य दे देते हैं और फिर बारी-बारी से इसकी जांच करते हैं। एक शिक्षक के सहारे स्कूल नहीं चल पा रहा है। इसका असर पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर पढ़ रहा है। ऐसे बच्चों पर शिक्षकों को अतिरिक्त ध्यान देना पड़ता है।
कम होने लगी विद्यार्थियों की संख्या
शिक्षक न होने के कारण इस पाठशाला में बच्चों की संख्या कम होने लगी है। पहले बच्चों की संख्या 550 के करीब थी, जो घटकर 440 तक पहुंच गई है। अभिभावक अपने बच्चों को निकाल कर निजी विद्यालयों में भेजने के लिए मजबूर हो गए हैं। यही नहीं यहां पर शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के लिए अभिभावकों ने प्रदर्शन भी किया था।
तबादला नीति के बाद यहां से काफी शिक्षक चले गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारी को आंतरिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति करने के आदेश दिए हैं। - अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।