संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 53वें दिन साध्वी सुदीप्ति महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को समझाया कि कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। जब भी मनुष्य पर विपत्ति आती है तो वह सोचता है कि मैंने ऐसे कौन से कर्म किए हैं, जिनका फल मुझे भोगना पड़ रहा है? परंतु सच्चाई यही है कि व्यक्ति को अपने किए हुए कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है।
साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है, इज्जत होती है, सम्मान होता है, वहां ही देवता निवास करते हैं। नारी जगत की सर्वोच्च शक्ति है। नारी हर क्षेत्र में आगे है। आज नारी को दबाने की कोशिश की जाती है, लेकिन नारी नर से कम नहीं है। नारियों की महिमा से इतिहास के अनेकों ग्रंथ भरे पड़े हैं। वैदिक धर्म में कथा आती है सावित्री व सत्यवान की।
सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान को छुड़ा लिया था।जैन धर्म में वर्णन आता है कि राजुल ने अपने वचनों से रथनेमि को संयम में दृढ़ कर दिया था। नगिला श्राविका ने भवदेव मुनि को शिक्षा देकर संयम में दृढ़ कर दिया था। नारी की शक्ति को किसी भी सूरत में कमतर नहीं आंकना चाहिए।