पानीपत। स्वास्थ्य विभाग ने आधी अधूरी तैयारी के साथ वीरवार को सात दिवसीय सर्जिकल शिविर शुरू किया। जिला नागरिक अस्पताल में पहले दिन ही 12 ऑपरेशन किए गए। इनमें हड्डी के छह, आंख के तीन, जरनल सर्जन के दो और एक सिजेरियन डिलीवरी कराई। सर्जन के ऑपरेशन थियेटर में होने के चलते पूरा दिन ओपीडी में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जरनल सर्जन, आर्थो और नेत्र रोग विशेषज्ञ न मिलने से करीब 150 मरीजों को परेशानी हुई। इनमें कुछ को बिना दवा के ही लौटना पड़ा
जिला नागरिक अस्पताल में वीरवार को सुबह नौ से सायं पांच बजे तक कैंप के तहत ऑपरेशन किए गए। विभाग का एक लक्ष्य एक दिन में करीब 15 ऑपरेशन करने का लक्ष्य रहा है। पहले दिन वीरवार को आयुष्मान कार्डधारकों के 12 ऑपरेशन हुए। एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी की चिकित्सक) डॉ. कविता ने बताया कि सामान्य दिनों में अस्पताल में एक दिन में करीब 13 ऑपरेशन होते हैं। कैंप के दौरान आयुष्मान कार्डधारकों को प्राथमिकता दी गई है। सामान्य वैसे ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं। वीरवार को शाम पांच बजे तक सभी आयुष्मान कार्डधारकों के 12 ऑपरेशन किए हैं। अस्पताल के ऑपरेशन थियरेटर में छह बेड की सुविधा है। इनमें सिजेरियन डिलीवरी, आंख, हड्डी, ईएनटी, जरनल सर्जन और एक अतिरिक्त बनाया गया है। यहां एक साथ छह ऑपरेशन किए जा सकते हैं।
चिकित्सक नहीं मिलने से मरीजों को आई दिक्कत
चिकित्सकों की ड्यूटी ओटी में लगने से ओपीडी में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जरनल सर्जन, आर्थो और नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं मिले। इनसे संबंधित करीब 150 मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ को बिना दवा के ही लौटना पड़ा। जरनल सर्जन वार्ड में दोपहर 12:30 बजे तक डॉ. अनिल ने मरीजों की जांच की। इसके बाद कक्ष खाली रहा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. शालिनी की ड्यूटी ओटी में रही और डॉ. केतन भारद्वाज की ड्यूटी शहर में किसी अस्पताल में किसी जांच के लिए ड्यूटी लगाई गई थी। ऐसे में मरीजों को परेशानी हुई।
शामड़ी गांव के मुकेश ने बताया कि उनको आंखों में बीमारी है। उनको सोनीपत से करनाल भेजा गया और करनाल से पानीपत के जिला नागरिक अस्पताल में भेजा गया है। वे सुबह 11 बजे अस्पताल में जांच के लिए आ गए थे। चिकित्सक के लिए दोपहर एक बजे तक इंतजार किया। करीब डेढ़ बजे चिकित्सक आए। उनको तीन शहरों में घूमने और एक दो घंटे के इंतजार के बाद दवा मिल पाई है। ब्रह्मा चौक की लाली देवी ने बताया कि वह हड्डी में दर्द होने से आर्थो के पास जांच के लिए आई थी। चिकित्सक की ड्यूटी ओटी में होने की जानकारी मिली। उनको बिना दवा के लिए ही लौटना पड़ा।
सर्जिकल कैंप में विशेषज्ञ की ड्यूटी लगाई गई थी। पहले दिन 12 लोगों के ऑपरेशन किए गए हैं। कैंप के दौरान विशेषज्ञ की जगह ओपीडी में दूसरे चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई थी। किसी में चिकित्सक नहीं थे तो उनसे बात की जाएगी।
- डॉ. विजय मलिक, सीएमओ।