यमुनानगर। पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद से लोग परेशान हैं। किसी गांव में पानी निकासी के लिए नाला बनना है तो कहीं गली कच्ची है। कहीं बजट न होने से सफाई नहीं हो रही तो कहीं कुछ समस्या है। लोग छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
उधर, अधिकारियों का बहाना केवल एक ही है कि उनके पास बजट नहीं है। वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों की लापरवाही की वजह से डी-प्लान के तहत मिले 17 करोड़ 55 लाख रुपये में से 10 करोड़ 71 लाख रुपये ऐसे हैं जिन्हें अधिकारियों ने बिना खर्च किए वापस भेज दिया। सोमवार को स्थानीय शहरी निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने डीसी पार्थ गुप्ता के सामने अधिकारियों से कहा कि यह बड़े शर्म की बात है कि इतनी बड़ी रकम वापस चली गई। गांवों में लोग एक-एक ईंट लगवाने के लिए तरस रहे हैं। जिन अधिकारियों ने यह पैसा खर्च नहीं किया उन्हें नोटिस जारी कर कारण पूछा जाए।
डॉ. कमल गुप्ता शुक्रवार को जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद अधिकारियों के साथ डी-प्लान की बैठक ले रहे थे। गत वर्ष डी-प्लान के तहत सरकार की तरफ से जिला प्रशासन को विकास कार्यों के लिए 17 करोड़ 55 लाख रुपये भेजे गए थे परंतु अधिकारी सालभर में केवल छह करोड़ 84 लाख रुपये ही खर्च कर सके। मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने पूछा कि जो पैसा आया था वह खर्च क्यों नहीं हुआ। बैठक में एक भी अधिकारी ऐसा नहीं था जो मंत्री को यह बता सके कि ऐसा क्यों हुआ। एडीसी आयुष सिन्हा ने मंत्री को बताया कि गत वर्ष 60 प्रतिशत पैसा ही विकास कार्यों पर खर्च किया जा सका। इस पर मंत्री ने संज्ञान लेते हुए डीसी पार्थ गुप्ता को निर्देश दिए कि डी-प्लान के तहत जिन भी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्यों पर पैसे खर्च नहीं किए हैं उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करें।
इस साल मिले 19.15 करोड़ रुपये
इस वर्ष डी-प्लान के तहत विकास कार्यों के लिए जिला प्रशासन को सरकार से 19 करोड़ 15 लाख रुपये मिले हैं। इसमें से करीब 12 करोड़ रुपये सामान्य वर्ग और करीब सात करोड़ रुपये अनुसूचित जाति वर्ग के लिए प्रयोग किया जाएगा। जिला परिषद के सीईओ नवीन आहूजा ने विश्वास दिलाया कि भविष्य में विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं मिलेगी। रादौर विधायक डॉ. बिशन लाल सैनी ने भी लोगों के काम न होने की शिकायत मंत्री से की। साढौरा विधायक रेनू बाल कष्ट निवारण समिति की बैठक में तो नहीं पहुंची थी, लेकिन उन्होंने विकास कार्यों के लिए हुई बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने भी अपनी विधानसभा में लोगों के काम न होने का मुद्दा उठाया।
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बराबर बांटा जाए पैसा : डा. कमल
मंत्री डॉ. कमल गुप्ता मंत्री ने डीसी को कहा कि डी-प्लान का पैसा समान मात्रा में वितरित किया जाए। साढौरा और रादौर में कांग्रेस के विधायक हैं। उनकी विधानसभाओं में भी जनसंख्या अनुसार बजट दिया जाए ताकि किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय न हो।
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अधिकारियों की तय हो जिम्मेदारी : घनश्याम दास
यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि जो भी विकास कार्य चल रहे हैं। उनके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि काम न होने पर उनसे पूछा जाए कि किस कारण से विकास कार्य नहीं हुआ। सरकार द्वारा विकास कार्य के लिए भेजे गए पैसे का वापस जाना बहुत दुख की बात है।