संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिन महिलाओं को पहले से टीबी होती है। उनके नवजात बच्चों में भी टीबी होने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसे बच्चों का न केवल रिकॉर्ड रखना जरूरी है बल्कि सही समय पर उनका उपचार भी आवश्यक है। इसके लिए मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के अलावा, सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी, सभी सीएचसी और 10 निजी अस्पतालों में प्रेजेंटिव टीबी हब साइट रजिस्टर रखे जाएंगे। इन रजिस्टर में उन सभी नवजात बच्चों का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिनकी मां पहले से ही टीबी से ग्रस्त हैं।
टीबी की पहचान करने के लिए इंसानों की बलगम का सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है। बड़ों का तो सैंपल आसानी से लिया जा सकता है, लेकिन नवजात बच्चों का सैंपल लेने में काफी दिक्कत आती है। क्योंकि नवजात के शरीर में बलगम नहीं बनती। इसलिए इन बच्चों के पेट में नली डाल कर सैंपल लिया जाता है। सरकारी अस्पतालों के अलावा उन प्राइवेट अस्पतालों में प्रेजेंटिव टीबी हब साइट रजिस्टर रखे जाएंगे जहां पर बाल रोग विशेषज्ञ हैं।
2027 तक जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू कर रखा है। इसके तहत जिले के सभी लोगों का सर्वे किया जा रहा है। अब तक तक 887264 लोगों का सर्वे किया जा चुका है। सर्वे के लिए 1478 कर्मियों की टीम लगी हुई है। जो घर-घर जाकर उन लोगों का डाटा तैयार करते हैं जिनके चेहरे पर दाग धब्बे, बीड़ी व शराब का सेवन करने के अलावा उन्हें कई सप्ताह से खांसी व बुखार है।
यह सारा डाटा एनटीईपी (नेशनल ट्यूबरक्लोसिस इलीमिनेशन प्रोग्राम) एप पर अपलोड किया जा रहा है। ऐसे लक्षण वाले लोगों के सैंपल लेकर उसकी लैब में जांच की जाती है। जिनमें पुष्टि होने पर टीबी का उपचार शुरू किया जाता है। अब तक हुए सर्वे में 15861 लोग ऐसे मिले हैं जो काफी मात्रा में बीड़ी का सेवन करते हैं। 1301 लोगों के चेहरे पर धब्बे मिले। 55 लोगों ने उपचार पूरा होने से पहले बीच में ही छोड़ दिया। इस सर्वे में टीबी के 600 से अधिक नए मरीज मिले हैं। जिले में टीबी के मरीजों की कुल संख्या 1823 हो गई है।
इलाज पूरा करना जरूरी : डॉ. अनूप
स्वास्थ्य विभाग में टीबी उन्मूलन अभियान के डॉ. अनूप गोयल का कहना है कि नवजात बच्चों में टीबी की पहचान करने के लिए प्रेजेंटिव टीबी हब साइट रजिस्टर रखे जाएंगे। यह रजिस्टर बनवा लिए गए हैं। सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में भी रजिस्टर रखे जाएंगे। टीबी का उपचार पूरा करना जरूरी है। बीच में दवाई छोड़ने से यह बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पाती।