संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी पूरी होने का नाम नहीं ले रही। जिले में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही स्टाफ। इसका असर सीधे अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में हर समय डॉक्टरों के केबिन के सामने उपचार के लिए आए मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
एक डॉक्टर को दिनभर में काफी मरीज देखने पड़ते हैं इसलिए उपचार मिलने में काफी समय लगता है। जिले में डॉक्टरों से लेकर रेगुलर स्टाफ के कुल 1021 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 515 पद ही भरे हुए हैं और 506 पद खाली पड़े हैं। डॉक्टरों की कमी कितनी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है 105 करोड़ रुपये से बने 200 बेड के मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में ढाई साल से एक फिजिशियन तक नहीं हैं।
फिजिशियन न होने से मरीज बेहाल हैं। जिन मरीजों का उपचार फिजिशियन को करना चाहिए उन्हें दूसरे डॉक्टर देख रहे हैं। वहीं अस्पताल में गर्भवतियों की डिलीवरी कराने के लिए गायनी भी नहीं हैं। अस्पताल की स्टाफ नर्स व एमबीबीएस डॉक्टर केवल नॉर्मल डिलीवरी ही करवा रहे हैं। सिजेरियन डिलीवरी के लिए यहां से गर्भवतियों को सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी में रेफर किया जा रहा है।
विभाग में डिप्टी सिविल सर्जन के नौ में से चार, एसएमओ के 17 में से छह, मेडिकल ऑफिसर के 192 में से 96 पद खाली हैं। डॉक्टरों की कमी कब तक पूरी होगी इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। अधिकारी डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए मुख्यालय में पत्र तो लिख रहे हैं, जवाब में केवल आश्वासन मिलता है।
डॉक्टरों के आने को लेकर कोई जवाब नहीं मिलता। जिले में जिला नागरिक व सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी के अलावा आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ये सभी डॉक्टरों व स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। जिले की आबादी 14 लाख को पार कर चुकी है।
कई बार मुख्यालय को लिख चुके : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि डॉक्टरों व स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय में कई बार पत्र लिख चुके हैं। वहां से इसे लेकर सकारात्मक जवाब ही मिलता है। उम्मीद है जल्द ही नए डॉक्टर मिल जाएंगे जिससे बाद मरीजों को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।