संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ऐसा कोई हादसा जिले में हो जाए तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। कारण यह है कि जिले में संचालित करीब 170 कोचिंग सेंटरों में से किसी के पास भी फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं लेकिन सुरक्षा मानकों की ओर शायद ही किसी का ध्यान गया हो। अधिकांश कोचिंग सेंटर 15 से 18 फीट चौड़ी इमारतों में चल रहे हैं। दो से तीन मंजिला इन भवनों में आने-जाने के लिए केवल एक सीढ़ी है। किसी भी संस्थान में वैकल्पिक आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं मिली।
आग लगने या भगदड़ जैसी स्थिति में ऐसी इमारतें छात्रों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऊपरी मंजिलों पर मौजूद विद्यार्थियों के पास बाहर निकलने का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं होगा। कई भवनों में सीढ़ियों की चौड़ाई इतनी कम है कि एक समय में केवल एक ही छात्र चढ़ या उतर सकता है। यदि दो एक साथ आना जाना करें तो बीच में ही फंस जाएंगे।
शहर के प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर हुडा के एससीओ भवनों में संचालित हो रहे हैं। इन भवनों का मूल नक्शा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए स्वीकृत था, लेकिन वर्तमान में इनमें कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे हैं। भवनों की सीमित चौड़ाई के कारण फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना भी चुनौती बना हुआ है।
पड़ताल के दौरान कई ऐसे संस्थान भी मिले जहां दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां बनी हैं। कई जगहों पर एक भी अग्निशामक यंत्र मौजूद नहीं मिला। इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों छात्र इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंचते हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अनजान बने हुए हैं।
सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए : वरयाम सिंह
आरटीआई एक्टीविस्ट एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि संबंधित विभागों की ओर से समय-समय पर निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट किया जाना चाहिए, ताकि किसी संभावित हादसे को रोका जा सके। लखनऊ की घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में जिले के कोचिंग सेंटरों की व्यापक जांच, फायर सेफ्टी ऑडिट और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
जिस भवन में कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, उनकी एनओसी लेना जरूरी होता है। हमारे पास अभी एनओसी के लिए किसी संस्थान से आवेदन नहीं आया है। फिलहाल होटलों की जांच चल रही है। कोचिंग सेंटरों की भी जांच की जाएगी। - पंकज पराशर, जिला दमकल अधिकारी, यमुनानगर।
कोचिंग सेंटर में जाने के लिए बनी ढाई फीट चौड़ी सीढ़ी। संवाद