संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहरवासी केवल कूड़ा नहीं उठने या फिर गलियों में स्ट्रीट लाइट न होने से ही नहीं बल्कि शहर में बेसहारा कुत्तों, बंदर व गोवंश से भी परेशान हैं। पार्षदों के साथ-साथ शहरवासियों को भी उम्मीद थी कि बैठक में इनका कोई समाधान निकलेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सदन में पता चला कि अभी तक कुत्तों की नसबंदी व बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने का मामला अभी टेंडर में ही उलझा हुआ है।
अधिकारियों ने हाउस में पार्षदों को बताया कि कुत्तों की नसबंदी कराने के लिए टेंडर लगाया था। परंतु एक ही फर्म ने टेंडर के लिए आवेदन किया था। सिंगल बिड होने के कारण एजेंसी को वर्क अलॉट नहीं किया जा सका। इसलिए दोबारा टेंडर लगाया जाएगा। इसी तरह बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने का टेंडर भी लगाया हुआ है।
सीएसआई अनिल नैन ने कहा कि यदि उन्हें गोवंश को गोशाला तक ले जाने के लिए एक वाहन और इस पर स्टाफ मिल जाए तो वह एक माह में शहर को कैटल फ्री कर देंगे। फिलहाल उनके पास एक ही वाहन है और इस पर पांच-छह कर्मचारियों का स्टाफ है। निगम आयुक्त अखिल पिलानी ने सभी पार्षदों से कहा कि वह अपने-अपने वार्ड में अनुमानित बेसहारा गोवंश की संख्या बता दें ताकि उसी प्रकार से काम किया जा सके।
बंदरों के परेशान हैं गांधी धाम काॅलोनी के लोग
नगर निगम के वार्ड सात की गांधी धाम काॅलोनी जगाधरी के निवासी कई साल से बंदरों के हमलों से परेशान हैं। कई बार वार्ड पार्षद और अधिकारियों को बताने पर भी समाधान नहीं हुआ। काॅलोनी वासी ऊषा किरण, संतोष कुमारी, उर्मिल सचदेवा, सुनीता कुमारी, गीतू, प्रदीप शर्मा, अशोक चावला, विनोद कुमार, शशि प्रभा, शशिभूषण सिंगला, नवदीप गुप्ता, सुनीता शर्मा, अजय गुप्ता, राजीव राठौर, भारत भूषण, पारस, सरिता ने बताया कि न तो बंदरों के डर से बाहर निकल पाते हैं और न ही बाहर कपड़े सूखा सकते हैं। बच्चे बाहर गली में नहीं खेल पाते। प्रतिदिन बंदरों का झुंड जिसमें 15 से 20 बंदर होते हैं घरों के ऊपर पानी की टंकी के ढक्कन तोड़ देना, कपड़ों का फाड़ देना, घरों से सामान उठा ले जाना, यहां तक कि घर के अंदर आकर फ्रिज खोल कर सामान बिखेर देना तो आम बात हो गई है।