छठ पर्व के नजदीक आते ही पूर्वोत्तर भारत में जाने वाली अधिकतर ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। सूरत-ए-हाल यह है कि पीछे से ही ट्रेनें खचाखच भरकर आ रही हैं और उसमें सवार यात्री बोगी के दरवाजे को अंदर से बंद रखते हैं।
ऐसी स्थिति में यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में चढ़ने के लिए मारामारी की स्थिति पैदा हो गई है। पर्व पर घर पहुंचने की चाह में हर कोई किसी तरह ट्रेन में चढ़ने की फिराक में है, इसके कारण बनी धक्का-मुक्की की स्थिति में रोजाना सैकड़ों यात्रियों की ट्रेनें छूट रही हैं, तो अंदर चढ़ने के बाद भी सीट छोड़ पैर रखने को भी जगह मिलना मुश्किल है।
हजारों यात्री ट्रेनों के दरवाजों-खिड़कियों पर लटक, शौचालयों या फिर कपड़ों से खुद को बांधकर सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में ट्रेनों में चढ़ने के लिए यात्री जान जोखिम में डाल रहे हैं, किंतु यह सब जगजाहिर होने पर भी यात्रियों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। ट्रेनों में छठ पर्व के कारण भारी भीड़ के आगे रेलवे प्रशासन की तैयारियों नाकाफी साबित हो रही हैं।
स्टेशन पर यूपी-बिहार जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों का स्टॉपेज करीब दो मिनट का होता है। ऐसे में स्टेशन पर जुड़ी हजारों यात्रियों की भीड़ के चलते सुरक्षा व्यवस्था और उन्हें ट्रेन में चढ़ाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की बनती है।
इसी बात का जायजा लेने के लिए अमर उजाला ने शनिवार को यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन का दौरा किया तो यात्रियों की सुरक्षा के प्रति रेलवे प्रशासन द्वारा बरती जा रही लापरवाही उजागर हुई। दोपहर एक बजे प्लेटफार्म नंबर-दो पर अमृतसर-सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस आकर रुकी।
ट्रेन की सभी बोगियां यात्रियों से खचाखच भरी थीं और पांच बोगियों के दरवाजे बंद मिले। अधिकतर शौचालयों में भी यात्री सफर करते मिले, जबकि कई बोगियों में यात्री कपड़े से झूले की तरह जुगाड़ कर लटके हुए नजर आए। ट्रेन में चढ़ने के लिए यात्री दरवाजे पीटते रहे, किंतु अंदर से दरवाजे नहीं खोले गए।
जबकि कई बोगियों में दरवाजे तक लटक कर सफर कर रहे यात्रियों से आग्रह करने पर भी उन्हें अंदर घुसने को जगह नहीं मिल पाई। दो मिनट बाद ट्रेन रवाना हो गई और सैकड़ों लोगों ट्रेन में चढ़ने से रह गए।
नहीं खुलते दरवाजे, आपातकालीन खिड़की बनी सहारा
यूपी-बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में बढ़ी भीड़ से अधिकांश की बोगियों के दरवाजे अंदर से बंद रहते हैं। इस दिशा में रेलवे पुलिस की कार्रवाई बनती है, किंतु बंद दरवाजों को खुलवाने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। इसको लेकर कई बार यात्रियों में कहासुनी व झगड़े की नौबत भी बन जाती है। इन्हीं परेशानियों के बीच सैकड़ों यात्रियों की एक के बाद एक ट्रेन छूट रही है और उन्हें गंतव्य तक पहुंचने में घंटों इंतजार के साथ कई दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है।
जानलेवा व गैर-कानूनी, पर रोकने वाला कोई नहीं
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-एक की लंबाई कम होने के कारण यहां रुकने वाली ट्रेनों के सभी डिब्बे प्लेटफार्म पर नहीं आते। लगभग सभी ट्रेनों के तीन-चार डिब्बे प्लेटफार्म के पीछे रुकते हैं। इन डिब्बों से चढ़ने और उतरने वाले यात्रियों को परेशानी होती है वहीं, इन दिनों ट्रेनों में भीड़ बढ़ने के कारण अधिकतर यात्री ट्रेन आने से पहले रेल पटरी के पार जाकर खड़े हो जाते हैं। ट्रेनों में इस तरह सफर करना न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि गैर कानूनी भी है।
यूपी-बिहार की ट्रेनों में चढ़ना मुश्किल
छठ पर्व के चलते यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन पर डाउन साइड में यूपी-बिहार की लगभग सभी ट्रेनों से पीछे से खचाखच चल रही हैं। इनमें सबसे अधिक भीड़ दोपहर 12:15 बजे आने वाले जनसेवा एक्सप्रेस (अमृतसर-सहरसा), रात 10:43 बजे आने वाली सद्भावना एक्सप्रेस (चंडीगढ़-लखनऊ) 11:50 बजे हावड़ा एक्सप्रेस (अमृतसर-हावड़ा) 12:20 बजे हावड़ा मेल (अमृतसर-हावड़ा) 12:40 बजे जननायक एक्सप्रेस (अमृतसर-दरभंगा) सुबह 5:20 बजे श्यालदा (जम्मू-कोलकाता) 6:10 बजे हिमगिरी (जम्मू-हावड़ा) शनिवार और मंगलवार को रात 11:25 बजे हरिहर एक्सप्रेस (अंबाला-मुजफ्फरपुर) सहित यूपी-बिहार की अधिकांश ट्रेनों में चढ़ना मुश्किल है।