संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। सरकार और शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी कुशल बिजनेस चैलेंज (केबीसी) योजना इस बार बजट के अभाव में अधर में लटक गई है। हर वर्ष सितंबर में स्कूलों में शुरू होने वाले कार्यक्रम की अभी कोई सूचना व जानकारी नहीं है। इससे नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को उद्यम कौशल का प्रशिक्षण देने की योजना प्रभावित हो रही है।
केबीसी के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यवसाय और उद्यमिता से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार देने की क्षमता विकसित करना है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को व्यावसायिक सोच, नए आइडिया विकसित करने, उत्पाद तैयार करने, उसकी मार्केटिंग और व्यवसाय संचालन से जुड़े अन्य कौशल सिखाए जाते हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से हर वर्ष स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को इस गतिविधि से जोड़ा जाता है। इससे विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की भावना विकसित करने का प्रयास किया जाता है। सितंबर में शैक्षणिक सत्र के दौरान इसकी गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद रहती है, पर इस बार बजट न आने से कार्यक्रम के संचालन में देरी हो रही है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बजट मिलने के बाद योजना के तहत आगामी गतिविधियों को शुरू किया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों को अपने हुनर और कारोबारी सोच को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। जिला परियोजना सहसमन्वयक डॉ. धर्मवीर सिंह ने बताया कि योजना का बजट अभी आना बाकी है। इसके लिए निदेशालय से चर्चा हुई है। इसी माह बजट जारी कर दिया जाएगा। अक्तूबर से नवंबर तक केबीसी के तहत कार्यक्रम करवाए जाएंगे।
बजट प्रावधान में बदलाव
इस बार विभाग के बजट में कुछ बदलाव किया गया है। पहले यह बजट पीएफएम मद से जारी किया जाता था, जो सीधे जिला विभाग के पास पहुंचता था, परंतु अब यह बजट ट्रेजरी से जारी किया जाना है। इसके लिए निदेशालय की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यह पूरी होने के बाद बजट जारी होगा। बजट मिलने के बाद ही योजना पर काम किया जा सकेगा।
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विद्यार्थियों को मिलती है राशि
योजना के तहत विद्यार्थियों को प्रोत्साहन के लिए विभिन्न स्तर पर राशि दी जाती है। पहले स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाकर खंड स्तर पर पहुंचना होता है। खंड स्तर पर उन्हें प्रोजेक्ट मॉडल बनाने के लिए 5000 और जिलास्तर पर 10,000 रुपये की राशि मिलती है। यह राशि टीम स्तर पर मिलती है। वहीं, राज्यस्तर पर विद्यार्थियों को 75,000 रुपये दिए जाते हैं।