संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। देवउठनी एकादशी के साथ उदय हुआ विवाह मुहूर्त का तारा 52 दिन के लिए अस्त हो गया है। इस दौरान 16 दिसंबर खरमास लग जाएगा और विवाह व अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे। वहीं, 52 दिन के लिए शुक्र अस्त होगा, इसके चलते शहनाइयां नहीं गूंजेंगी। खरमास को शास्त्रों में निषेध काल कहा गया है। वहीं शुक्र के अस्त होने पर विवाह नहीं होते हैं। इसके बाद पांच फरवरी से विवाह के मुहूर्त हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि 16 दिसंबर से खरमास लग रहा है और यह 14 जनवरी तक रहेगा। शास्त्रों में खरमास को अशुभ माना गया है और इसमें विवाह, यज्ञोपवित, भूमि पूजन, नामकरण, गृह प्रवेश, मुंडन सहित इत्यादि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य गोचर करते हुए धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास लगता है। इस काल में सूर्य की गति धीमी होती है और तेज निम्म होता है।
मांगलिक कार्य के लिए सूर्य व गुरु का प्रबल होना आवश्यक होता है। खरमास में सूर्य कमजोर और गुरु अस्त होते हैं। यही कारण है कि इसमें मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो मकर संक्रांति होगी और इसके साथ सूर्य व गुरु प्रबल होंगे और मांगलिक कार्य किए जाएंगे।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि विवाह मुहूर्त के लिए शुक्र व गुरु ग्रह का उदय होना सबसे आवश्यक होता है। परंतु इस बार 12 दिसंबर से 31 जनवरी तक शुक्र अस्त रहेगा। सौरमंडल में गुरु ग्रह ने पांच दिसंबर को वक्री गति से कर्क से मिथुन राशि में प्रवेश किया है।
उन्होेंने बताया कि इस बार 12 दिसंबर को शुक्र 52 दिन के लिए अस्त हो जाएंगे और एक फरवरी को उदय होंगे। शुक्र अस्त होने के कारण वर्ष जनवरी में कोई भी विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं है। इसके बाद पांच फरवरी से विवाह के मुहूर्त शुभ मुहूर्त हैं।
वर्ष 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
फरवरी : 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20 और 21
मार्च : 7, 8, 9, 11, 12
अप्रैल : 15, 20, 21, 23, 25, 26, 27, 28, 29, 30
मई : 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14
जून : 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई : 1, 6, 7, 11, 12
नवंबर : 21, 24, 25, 26
दिसंबर : 2, 3, 4, 5, 6