यमुनानगर। जिस प्रकार एक जले हुए दीपक से हजारों दीपक जलाए जा सकते हैं, उसी प्रकार मनुष्य सत्संग में आकर अपने अंदर के ज्ञान रूपी दीपक को जला सकता है। इस ज्ञान रूपी दीपक के जलने से वह संसार को भी ज्ञानवान कर सकता है। यह शब्द निरंकारी मिशन यमुनानगर जोन के जोनल इंचार्ज महात्मा टेकचंद ने कहें। रविवार को संत निरंकारी भवन में आयोजित सत्संग में वे प्रवचन कर रहे थे। मंच संचालन महात्मा नरेश निरंकारी ने किया। सत्संग के दौरान अनेक संतों महापुरुषों ने भजनों और विचारों के माध्यम से एकता, भाईचारे व मिलवर्तन का संदेश दिया।
महात्मा टेकचंद ने कहा कि केवल सत्संग ही मनुष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर, कर्म रूपी प्रकाश की ओर ले जाती है। इसके लिए सतगुरु की शरण जरूरी है। जीवन में ज्ञान की रोशनी पाने के लिए सच्चे गुरु की भक्ति की आवश्यकता है। सतगुरु हमारे हर कदम, हर मुश्किल राह को सरल बना देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी विकट स्थिति में सेवा, सुमिरन व सत्संग मनुष्य की ढाल बनकर काम आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु को देखना ओर पाना दोनों बहुत ही जुदा परिस्थितियां है। प्रभु को जानना, पहचानना और मानना बहुत आवश्यक है। भगवान का कोई रूप रंग नहीं होता। भगवान सब पर बिना किसी भेदभाव के कृपा करते है। सतगुरु साकार होते हुए भी निराकार है। भगवान वह परम सत्य है, जिसे जानने के बाद सभी प्रकार के भ्रम मिट जाते हैं। किसी भी प्रकार भय नहीं रहता। स्वयं बाबा हरदेव सिंह महाराज कहते हैं कि ब्रह्म की प्राप्ति, भ्रम की समाप्ति। मात्र देखने से कोई लाभ नहीं होता, जब तक हम उस वस्तु का पा ना लें। हमें निरंतर उस प्रभु को पाने का प्रयत्न करना चाहिए। यदि हम प्रभु को पाने का प्रयास नहीं करेंगे, तो हमारा जीवन भी प्रभु भक्ति का लाभ नहीं उठा पाएगा। प्रभु स्वयं निरंकार रूप में हमारे साथ होते हैं। मानव को हर समय निरंकार रूप में सतगुरु की उपस्थिति महसूस करनी चाहिए। सत्संग में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।