यमुनानगर/रादौर। लंबे इंतजार के बाद प्रदेश सरकार ने हरियाणा नगरपालिका अधिनियम की धारा 1973 की धारा 3 के तहत रादौर को तीसरी बार नगरपालिका का दर्जा दिए जाने की घोषणा की है। शुक्रवार को डीसी डॉ. एसएस फुलिया ने अपने कार्यालय में रादौर को नगर पालिका बनाए जाने की जानकारी दी। रादौर पंचायत को भंग कर नगरपालिका का दर्जा दिए जाने पर कुछ ने खुशी जताई तो कुछ इसका विरोध कर रहे हैं।
चरमराई सफाई व्यवस्था से परेशान व बढ़ते नजायज कब्जों से दु:खी अधिकतर लोग रादौर में नगरपालिका बनाए जाने की मांग कर रहे थे। पिछले वर्ष 10 अप्रैल को रादौर अनाजमंड़ी में रादौर विकास रैली आयोजित की गई थी। इसमें लोगों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से रादौर में नगरपालिका बनाने को लेकर मांग रखी थी। रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों को विश्वास दिलाया कि उनकी मांग को जल्द पूरा किया जाएगा।
भाजपा नेता घनश्याम दास मनचंदा, अजय सिंह चौहान, मनमोहन गुप्ता, अमित कांबोज, सोमनाथ, कंवरपाल, बिट्टू, प्रदीप मिड्डा व जितेंद्र ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व मुख्य संसदीय सचिव एवं विधायक श्याम सिंह राणा सहित जिला उपायुक्त का आभार व्यक्त किया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीश सेतिया, राजू परूथी, राजकुमार शर्मा, हरीश आहूजा, टीटू व सचिन गुप्ता ने रादौर को नगरपालिका बनाने का स्वागत करते हुए कहा कि रादौर में ग्राम पंचायत होने से सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा चुकी है। 20 वार्डों की सफाई के लिए केवल छह सफाई कर्मचारी काम कर रहे थे। जगह-जगह गंदगी के ढ़ेर लगे हैं।
नजायज कब्जे दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे थे। जगह-जगह अवैध कॉलोनियां बन रही थी। नगरपालिका बनने से सफाई व्यवस्था नियमित होगी। वहीं नजायज कब्जों पर अंकुश लगेगा। नगरपालिका में सफाई कर्मचारी नियुक्त हाेंगे, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा और रादौर में गंदगी नहीं फैलेगी। वहीं रादौर के सभी वाड़ोर्ं में नियमित सफाई होगी। रादौर में अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगेगा।
1924 में पहली बार बनी थी नगर पालिका
देश की आजादी से पूर्व वर्ष 1924 में अंग्रेजों ने रादौर को टाऊन कमेटी का दर्जा दिया था। तभी से रादौर में नगरपालिका चल रही थी। वर्ष 2000 में प्रदेश की चौटाला सरकार ने रादौर की नगरपालिका को भंग करके इसे गांव का दर्जा दे दिया। वर्ष 2006 में फिर प्रदेश की हुड्डा सरकार ने रादौर को नगरपालिका का दर्जा दे दिया। उस समय लोगों के विरोध को देखते हुए फिर वर्ष 2007 में रादौर को ग्राम पंचायत का दर्जा दे दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि गांव बनने से विकास होगा। गांव में ज्यादा ग्रांट सरकार देगी, सफाई व्यवस्था अच्छी होगी, लेकिन हालात नहीं सुधरे। गृह एवं विकास कर से लोगों को भले ही मुक्ति मिल गई थी, लेकिन रादौर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई और नाजायज कब्जों की भरमार हो गई।
नोटिस मिलने पर जाएंगे कोर्ट : सरपंच
सरकार द्वारा रादौर पंचायत को भंग कर नगरपालिका बनाए जाने का पंचायत ने भी विरोध करना शुरू कर दिया है। जिसको लेकर शनिवार को रादौर पंचायत के सरपंच विनोद वर्मा ने पंचों की बैठक बुलाई है। विनोद वर्मा ने बताया कि उनकी पंचायत का अभी ढाई वर्ष का कार्यकाल बकाया है। सरकार उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद रादौर में नगरपालिका बनाए तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। अपना बकाया कार्यकाल पूरा करने के लिए पंचायत मामले को लेकर माननीय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रही है।
इनेलो ने किया विरोध
रादौर में नगरपालिका बनाए जाने का इनेलो पार्टी ने कड़ा विरोध किया है। इनेलो पार्टी की ओर से जिला प्रधान व पूर्व विधायक रादौर डॉ. बीएल सैनी व पूर्व विधायक ईश्वर सिंह पलाका ने कहा कि कस्बा रादौर के 80 प्रतिशत से अधिक लोग कस्बें में पंचायत व्यवस्था बनाए जाने के पक्षधर हैं। रादौर में नगरपालिका बनने से गरीब लोगों पर टैक्सों की मार पडे़गी। नगरपालिका बनने से कस्बे के लोगाें पर अफसरशाही हावी होगी। कस्बे की आय न के बराबर है। ऐसे में नगरपालिका बनने पर कस्बे के लोगों को नगरपालिका का लाखों रुपये का बोझ हर महीने वहन करना पडे़गा।